अंतरिक्ष यात्रियों की शयन क्रिया
अंतरिक्ष में हर 90 मिनट में सूर्योदय और सूर्यास्त हो जाता है, जिससे दिन-रात का अंदाज़ा लगाना मुश्किल होता है। इसीलिए अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर ग्रीनविच मीन टाइम के अनुसार अंतरिक्षयात्री अपनी दिनचर्या अपनाते हैं।
अंतरिक्ष में बढ़ जाती है लंबाई
गुरुत्वाकर्षण न होने के कारण रीढ़ की हड्डी फैल जाती है। इससे अंतरिक्षयात्रियों की लंबाई 5 से 8 सेंटीमीटर तक बढ़ सकती है, लेकिन धरती पर लौटने के बाद पीठ दर्द हो सकता है।
खर्राटों में होती है कमी
शोध में सामने आया है कि अंतरिक्ष में सोते समय खर्राटे कम आते हैं। क्योंकि खर्राटों के लिए गुरुत्वाकर्षण जिम्मेदार होता है, जो अंतरिक्ष में नहीं होता।
एक साल से ज्यादा अंतरिक्ष में रहना
सुनीता विलियम्स का लंबा मिशन चर्चा में रहा, लेकिन रिकॉर्ड उनके नाम नहीं है। रूस के वलेरी पोलियाकोव ने मीर स्पेस स्टेशन में 438 दिन बिताकर इतिहास रचा था।
अंतरिक्ष में कुल कितनी मौतें हुईं
वर्ष 2004 तक 439 अंतरिक्षयात्री अंतरिक्ष यात्रा कर चुके थे। तकनीकी रूप से केवल 4 मौतें ही अंतरिक्ष में हुईं, जिनमें सोयूज-11 दुर्घटना शामिल है।
धरती के वातावरण से सामंजस्य कठिन
अंतरिक्ष से लौटने के बाद गुरुत्वाकर्षण में ढलना आसान नहीं होता। कई अंतरिक्षयात्री महीनों तक चीज़ें अनजाने में हवा में छोड़ देते हैं।
स्पंज स्नान क्यों है बेहतर
स्पेस स्टेशन पर शावर होने के बावजूद पानी बचाने के लिए स्पंज बाथ किया जाता है। नासा पानी को रिसायकल करने वाली तकनीक पर काम कर रहा है, जिससे भविष्य में स्नान आसान होगा।