
यरवदा जेल की ऐतिहासिक भूख हड़ताल 1932 में दलितों के लिए अलग निर्वाचन मंडल के विरोध में गांधीजी ने यरवदा जेल में आमरण अनशन शुरू किया। डॉ. अंबेडकर से हुए ऐतिहासिक समझौते ने पूना पैक्ट को जन्म दिया, जिसने सामाजिक एकता की नई राह बनाई।

काकोरी कांड के गुमनाम क्रांतिकारी काकोरी कांड में केवल कुछ नाम ही प्रसिद्ध हुए, जबकि कई युवा गुमनामी में कुर्बान हो गए। इन क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी सत्ता की आर्थिक नींव हिला दी।

1857 की क्रांति की वीरांगनाएं 1857 की क्रांति में महिलाओं ने भी तलवार उठाई और अंग्रेजों से लोहा लिया। झलकारी बाई, ऊदा देवी और अवंतीबाई लोधी का साहस आज भी प्रेरणा देता है।

नेताजी का ऐतिहासिक रेडियो संदेश 1942 में टोक्यो रेडियो से नेताजी सुभाष चंद्र बोस का ‘दिल्ली चलो’ का नारा गूंजा। इस संदेश ने लाखों युवाओं को INA से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

नागालैंड का अनदेखा स्वतंत्रता संघर्ष नागालैंड का आज़ादी का संघर्ष मुख्यधारा के इतिहास से दूर रहा। 1947 में नागा नेताओं ने स्वतंत्रता की घोषणा कर अलग पहचान की मांग रखी।

अंडमान की सेल्युलर जेल के शहीद ‘काला पानी’ कहे जाने वाली सेल्युलर जेल क्रांतिकारियों के लिए नरक थी। अमानवीय यातनाएं झेलते हुए कई सेनानी यहीं गुमनाम शहीद हो गए।

चंपारण सत्याग्रह के नायक राजकुमार शुक्ल चंपारण आंदोलन के पीछे एक साधारण किसान राजकुमार शुक्ल की बड़ी भूमिका थी। उन्होंने ही गांधीजी को किसानों की पीड़ा से रूबरू कराया।

‘इंकलाब ज़िंदाबाद’ का सच यह क्रांतिकारी नारा भगत सिंह से पहले हसरत मोहानी ने दिया था। बाद में यह आज़ादी की लड़ाई की पहचान बन गया।

भारत छोड़ो आंदोलन में बच्चों का साहस 1942 के आंदोलन में बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। नारे लगाना, संदेश पहुंचाना और गिरफ्तारी झेलना—सब उन्होंने किया।

आज़ादी की पहली बरसाती सुबह 15 अगस्त 1947 को बारिश के बीच तिरंगा फहराया गया। यह तारीख केवल संयोग नहीं, बल्कि इतिहास से जुड़ा एक खास दिन थी।