मनुस्मृति और जन्मना जाति का भ्रम
मनुस्मृति उस युग की रचना है जब जन्म से जाति तय करने की कोई अवधारणा ही नहीं थी। इस ग्रंथ में समाज व्यवस्था को जन्म नहीं, बल्कि गुण, कर्म और स्वभाव से जोड़ा गया है।

मनुस्मृति और जन्मना जाति का भ्रम मनुस्मृति उस युग की रचना है जब जन्म से जाति तय करने की कोई अवधारणा ही नहीं थी। इस ग्रंथ में समाज व्यवस्था को जन्म नहीं, बल्कि गुण, कर्म और स्वभाव से जोड़ा गया है।