
अल्लूरी सीताराम राजू आंध्र प्रदेश के जंगलों से उठी आज़ादी की चिंगारी बने अल्लूरी सीताराम राजू ने आदिवासियों को संगठित कर ब्रिटिश सत्ता को गुरिल्ला युद्ध से चुनौ

रानी गाइदिनल्यू (मणिपुर) किशोरावस्था में ही रानी गाइदिनल्यू ने नागा समुदाय का नेतृत्व कर अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष छेड़ा और अद्भुत साहस दिखाया।

बेगम हजरत महल (अवध) 1857 के विद्रोह में बेगम हजरत महल ने अवध की धरती से अंग्रेजों को खुली चुनौती दी और महिला नेतृत्व की मिसाल कायम की।

मातंगिनी हाजरा (बंगाल) 73 वर्ष की उम्र में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान तिरंगा हाथ में लेकर शहीद हुईं मातंगिनी हाजरा साहस की अमर प्रतीक बनीं।

बौद्ध भिक्षु पा रंजीत (श्रीलंका) सीमा पार से भारत की आज़ादी की लड़ाई में शामिल होकर पा रंजीत ने यह साबित किया कि स्वतंत्रता मानवता की साझा लड़ाई है।

कनूरी लक्ष्मीबाई (पत्रकार) अपनी लेखनी को हथियार बनाकर कनूरी लक्ष्मीबाई ने महिलाओं की शिक्षा और राष्ट्रीय चेतना को नई दिशा दी।

बिश्नी देवी साह (उत्तराखंड) पहाड़ों से उठी बिश्नी देवी साह की आवाज़ ने स्वतंत्रता आंदोलन को जन-जन तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई।

सुशीला दीदी (पंजाब) पंजाब की सुशीला दीदी ने क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय भाग लेकर महिलाओं की भागीदारी को नई पहचान दी।

प्रीतिलता वाद्देदार (बंगाल) युवावस्था में ही अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ बलिदान देकर प्रीतिलता वाद्देदार ने क्रांति की अमर गाथा लिखी।

बैकुंठ शुक्ल (बिहार) बैकुंठ शुक्ल ने अंग्रेजों के अत्याचारों का डटकर विरोध किया और देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।

वान्चीनाथन अय्यर (तमिलनाडु) तमिलनाडु के वान्चीनाथन अय्यर ने ब्रिटिश अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर क्रांतिकारी साहस का परिचय दिया।

मेजर दुर्गा मल्ल (आजाद हिंद फौज) भारतीय राष्ट्रीय सेना के मेजर दुर्गा मल्ल ने नेताजी के साथ मिलकर आज़ादी के लिए प्राण न्यौछावर कर दिए।