
महाकुंभ भगदड़: आस्था का महासंगम बना त्रासदी मौनी अमावस्या पर प्रयागराज में उमड़ी करोड़ों की भीड़ बेकाबू हो गई। अव्यवस्था और सुरक्षा चूक के बीच भगदड़ में करीब 30 श्रद्धालुओं की जान चली गई।

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन: भीड़ ने छीनी सांसें महाकुंभ यात्रियों की भारी भीड़ और ट्रेनों की देरी ने हालात बिगाड़ दिए। प्लेटफॉर्म 14-15 पर मची भगदड़ में 15 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई।

आईपीएल जश्न में मातम: बेंगलुरु भगदड़ RCB की ऐतिहासिक जीत का जश्न अफरातफरी में बदल गया। चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर भगदड़ में 11 प्रशंसकों की मौत हो गई।

अहमदाबाद विमान हादसा: 241 जिंदगियां खत्म टेकऑफ के कुछ सेकंड बाद एयर इंडिया का विमान क्रैश हो गया। यह हादसा भारतीय विमानन इतिहास की सबसे दर्दनाक त्रासदियों में शामिल हो गया।

तेलंगाना फैक्ट्री विस्फोट: मजदूरों पर भारी लापरवाही संगारेड्डी की केमिकल फैक्ट्री में जोरदार विस्फोट से 10 मजदूरों की मौत हुई। सुरक्षा मानकों की अनदेखी इस हादसे की बड़ी वजह बनी।

पहलगाम आतंकी हमला और ऑपरेशन सिंदूर आतंकी हमले में 26 लोगों की जान गई और देश दहल उठा। जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाकर आतंक के खिलाफ कड़ा संदेश दिया।

गोवा अग्निकांड और करूर भगदड़ गोवा के नाइटक्लब में आग से 25 मौतें हुईं। तमिलनाडु के करूर में रैली के दौरान भगदड़ ने 41 लोगों की जान ले ली।

प्राकृतिक आपदाओं का कहर बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने से कई राज्य तबाह हो गए। लाखों लोग प्रभावित हुए और राहत व्यवस्था की सीमाएं उजागर हुईं।

1941 जैसा कैलेंडर: डर का संयोग 2025 का कैलेंडर 1941 से मेल खाने की चर्चा तेज रही। संयोग होने के बावजूद लगातार त्रासदियों ने लोगों को डरा दिया| यह साल लापरवाही और अव्यवस्था की भारी कीमत याद दिला गया। सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और आपदा तैयारी पर गंभीर सुधार अब जरूरी है।