“मुझे बस 10 मिनट दीजिए…”: अनुच्छेद 142 के तहत मिला ऐतिहासिक फैसला

मध्य प्रदेश के जबलपुर के 19 वर्षीय अथर्व चतुर्वेदी ने अपने साहस और दृढ़ संकल्प से देशभर में मिसाल कायम कर दी। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) से आने वाले अथर्व ने NEET परीक्षा में 530 अंक हासिल किए और MBBS सीट का दावा किया।
लेकिन राज्य सरकार की अधिसूचना में देरी और निजी मेडिकल कॉलेजों में EWS कोटा लागू न होने के कारण उनका एडमिशन रोक दिया गया।
शुरुआती संघर्ष: दो बार NEET क्वालिफाई, फिर भी नहीं मिला एडमिशन
अथर्व ने लगातार दो बार NEET परीक्षा पास की। 530 अंकों का स्कोर EWS श्रेणी में मजबूत दावेदारी के लिए पर्याप्त था। लेकिन मध्य प्रदेश में निजी मेडिकल कॉलेजों के लिए EWS आरक्षण की स्पष्ट नीति न होने के कारण उनका नाम मेरिट सूची से बाहर कर दिया गया। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे प्राइवेट कॉलेज की भारी फीस भर सकें।
हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक की लड़ाई
पहले उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन समयसीमा और नीति संबंधी कारणों का हवाला देकर याचिका खारिज कर दी गई। इसके बाद अथर्व ने हार नहीं मानी और सीधे Supreme Court of India में याचिका दायर की। जनवरी 2025 में दोबारा दाखिल की गई याचिका पर फरवरी में सुनवाई हुई।







