Phone Laptop Fertility Risk: जेब में फोन रखने से स्पर्म हेल्थ पर क्या असर पड़ता है?मोबाइल और लैपटॉप के इस्तेमाल को लेकर क्यों उठ रहे हैं सवाल? पैंट की जेब में मोबाइल फोन रखना और लैपटॉप को गोद में रखकर काम करना आम आदतें हैं। हालांकि, इन उपकरणों के इस्तेमाल और पुरुषों की प्रजनन क्षमता के बीच संभावित संबंध को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों में मुख्य रूप से दो पहलुओं पर ध्यान दिया गया है—लैपटॉप से पैदा होने वाली गर्मी और मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडियोफ्रीक्वेंसी ऊर्जा। लेकिन इन दोनों के संभावित प्रभावों को समझने के लिए उपलब्ध प्रमाणों और उनकी सीमाओं को ध्यान में रखना जरूरी है। विशेषज्ञ ने गर्मी और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ऊर्जा पर क्या बताया? ग्रेटर नोएडा के यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. अभिजीत कोटबागी के अनुसार, लैपटॉप की गर्मी और मोबाइल फोन से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ऊर्जा को पुरुषों की स्पर्म हेल्थ के संदर्भ में देखा जाता है। अंडकोष का तापमान सामान्यतः शरीर के आंतरिक तापमान से कुछ कम रहता है, जो शुक्राणुओं के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक गर्मी के संपर्क में रहने से इस तापमान में बदलाव हो सकता है। हालांकि, किसी उपकरण का इस्तेमाल करने मात्र से हर व्यक्ति की प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है, ऐसा निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता। गोद में लैपटॉप रखने पर क्या कहती हैं स्टडीज? लैपटॉप के इस्तेमाल से अंडकोष के तापमान में संभावित बदलावों का अध्ययन किया गया है। कुछ शोध में पाया गया कि गोद में लैपटॉप रखकर बैठने के दौरान तापमान बढ़ सकता है। एक अध्ययन में 29 स्वस्थ पुरुषों के तापमान को अलग-अलग परिस्थितियों में मापा गया। रिपोर्ट के अनुसार, लैपटॉप इस्तेमाल करते समय पैरों की स्थिति और लैपटॉप के नीचे पैड रखने जैसी परिस्थितियों में भी तापमान में वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, तापमान बढ़ने का परिणाम अपने आप में यह साबित नहीं करता कि संबंधित व्यक्ति के शुक्राणुओं की गुणवत्ता या प्रजनन क्षमता को नुकसान हुआ है। मोबाइल फोन और स्पर्म हेल्थ के बीच क्या संबंध है? मोबाइल फोन के इस्तेमाल और शुक्राणुओं की गुणवत्ता के बीच संभावित संबंधों पर भी अध्ययन किए गए हैं। कुछ शोध में फोन के अधिक इस्तेमाल और शुक्राणुओं की संख्या, गतिशीलता तथा अन्य गुणों में बदलाव के बीच संबंध देखा गया है। लेकिन ऐसे निष्कर्षों से यह साबित नहीं होता कि मोबाइल फोन का इस्तेमाल ही इन बदलावों का सीधा कारण है। अध्ययन में शामिल लोगों की जीवनशैली, स्वास्थ्य, फोन इस्तेमाल करने की अवधि और दूसरे कारक भी परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए इस विषय पर किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए अधिक मजबूत वैज्ञानिक प्रमाणों की जरूरत है।