मनोज बाजपेयी की ‘घूसखोर पंडित’ पर कानूनी शिकंजा: सड़कों पर उतरा ब्राह्मण समाज

अभिनेता मनोज बाजपेयी की आगामी नेटफ्लिक्स फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ रिलीज से पहले ही गंभीर विवादों में घिर गई है। फिल्म के शीर्षक को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें इसे ब्राह्मण समुदाय के प्रति अपमानजनक और मानहानिकारक बताया गया है। मामला अब केवल न्यायालय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश के कई हिस्सों में इसका सार्वजनिक विरोध भी तेज़ हो गया है।
दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका, रिलीज पर तत्काल रोक की मांग
दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि फिल्म के शीर्षक और प्रचार सामग्री में ‘पंडित’ शब्द को जानबूझकर भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी से जोड़ा गया है, जो एक विशेष धार्मिक और सामाजिक वर्ग की छवि को धूमिल करता है।
याचिकाकर्ता विनीत जिंदल, जिन्होंने स्वयं को जनहितैषी नागरिक बताया है, का कहना है कि यह फिल्म सांप्रदायिक रूप से आपत्तिजनक है और समाज में वैमनस्य फैलाने का काम कर सकती है। याचिका में यह भी कहा गया है कि फिल्म की रिलीज से सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव बिगड़ने की आशंका है, इसलिए अदालत को इसमें तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।
“संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 25 का उल्लंघन”
याचिका में दावा किया गया है कि फिल्म का शीर्षक और संभावित कंटेंट भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 21 (जीवन और गरिमा का अधिकार) और 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है। याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार को भी इस मामले में मुख्य पक्षकार बनाते हुए कहा है कि डिजिटल और OTT प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित होने वाले कंटेंट को नियंत्रित करना सरकार का संवैधानिक दायित्व है।
नेटफ्लिक्स पर फिल्म की प्रस्तावित रिलीज को लेकर यह भी तर्क दिया गया है कि क्रिएटिव लिबर्टी के नाम पर किसी समुदाय को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं हो सकता।




