अब अकेला नहीं ‘पंच: अब झुंड ने अपनाया

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अब झुंड ने अपनाया

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जापान के इचिकावा सिटी जू में 26 जुलाई 2025 को जन्मा नन्हा मकाक बंदर ‘पंच’ (Punch) जन्म लेते ही किस्मत की मार झेलने लगा। जन्म के तुरंत बाद उसकी मां ने उसे अपनाने से इनकार कर दिया। मां की गोद, जो हर जीव के लिए सबसे सुरक्षित ठिकाना मानी जाती है, पंच को नसीब नहीं हुई।
चिड़ियाघर के कर्मचारियों ने उसे संभाला, दूध पिलाया और देखभाल की, लेकिन ममता की वह गर्माहट नहीं दे सके जिसकी एक नवजात को सबसे ज्यादा जरूरत होती है।

खिलौने में तलाशता रहा मां की धड़कन
जब पंच थोड़ा बड़ा हुआ, तो उसने कई बार अपनी मां और झुंड के पास जाने की कोशिश की। लेकिन हर बार उसे दुत्कार कर भगा दिया गया। डरा-सहमा पंच आखिरकार अपने कमरे में लौट आता और अपने इकलौते साथी—एक सॉफ्ट टॉय (स्टफ्ड ओरांगुटन खिलौना)—को गले लगाकर सो जाता।
वायरल वीडियो में देखा गया कि वह खिलौने को सीने से लगाए ऐसे सोता था, मानो उसी में अपनी मां की धड़कन तलाश रहा हो। उसकी मासूमियत और अकेलेपन की यह तस्वीर सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गई। करोड़ों लोगों की आंखें नम हो गईं।

सोशल मीडिया पर भावनाओं का सैलाब
जैसे ही पंच की तस्वीरें और वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुए, दुनियाभर से प्रतिक्रियाएं आने लगीं। लोगों ने लिखा—
“मां का प्यार हर जीव का अधिकार है।”
“इस मासूम को देखकर दिल टूट जाता है।”
पंच सिर्फ एक बंदर नहीं रहा, बल्कि वह अकेलेपन और ममता की तलाश का प्रतीक बन गया।

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