ब्राह्मण और राजपूत बनकर नहीं: फर्जी जाति प्रमाण-पत्र कांड में 16 पर शिकंजा

मध्यप्रदेश में एक बड़े छात्रवृत्ति घोटाले का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि कुछ छात्रों ने खुद को OBC, SC और ST वर्ग का बताकर लगभग 10 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप प्राप्त की।
रिपोर्ट के अनुसार, कुल 30 छात्रों ने विदेश में पढ़ाई के लिए आवेदन करते समय कथित रूप से फर्जी जाति प्रमाण-पत्र लगाए। जांच के दौरान 16 लोगों द्वारा नकली जाति प्रमाण-पत्र बनवाने की पुष्टि हुई है। कई मामलों में प्रमाण-पत्र निरस्त भी कर दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि कुछ लाभार्थी वास्तविक रूप से ब्राह्मण और राजपूत समुदाय से थे, जिन्होंने खुद को पिछड़ा वर्ग या अनुसूचित जाति/जनजाति बताकर सरकारी योजनाओं का लाभ लिया।
जांच में क्या सामने आया?
विदेश अध्ययन के लिए दी गई छात्रवृत्ति में फर्जी दस्तावेज लगाए गए। 16 मामलों में नकली जाति प्रमाण-पत्र बनवाने की पुष्टि। कई प्रमाण-पत्र निरस्त। अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े। यह मामला अब केवल फर्जीवाड़े का नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और अवसरों की समानता से जुड़ा बड़ा प्रश्न बन गया है।
उठते बड़े सवाल
क्या यह फर्जीवाड़ा बिना अधिकारियों की मिलीभगत के संभव था?
असली हकदार SC, ST और OBC छात्रों का नुकसान कौन भरेगा?
जिन छात्रों ने आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई छोड़ दी, उनकी जिम्मेदारी किसकी?




