नाजुक शांति समझौता टूटा: ट्रंप के शांति दावों पर सवाल

दक्षिण-पूर्व एशिया में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। थाईलैंड और कंबोडिया के बीच साझा सीमा पर भारी गोलाबारी शुरू हो चुकी है, जिससे साढ़े पांच लाख से अधिक लोगों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है। यह संघर्ष ऐसे समय में दोबारा भड़का है जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने का दावा किया था।
मिस्टर ट्रंप के अनुसार अक्टूबर में दोनों देशों के बीच युद्धविराम हुआ था, लेकिन यह समझौता बेहद अल्पकालिक साबित हुआ। सीमा पर फिर से सैन्य टकराव ने न केवल इस शांति प्रयास को विफल कर दिया, बल्कि ट्रंप की मध्यस्थता क्षमताओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
दक्षिण-पूर्व एशिया एक राजनीतिक चौराहे पर
यह संघर्ष ऐसे दौर में हो रहा है जब थाईलैंड और कंबोडिया दोनों आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता से गुजर रहे हैं। कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मैनेट अभी भी अपने पिता हुन सेन की लंबी राजनीतिक विरासत से बाहर निकलकर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में हैं। वहीं थाईलैंड में सीमा तनाव को कम करने की एक कोशिश राजनीतिक विवाद में बदल गई, जिसके चलते तत्कालीन प्रधानमंत्री पैटोंगटार्न शिनवात्रा को महाभियोग का सामना करना पड़ा।
इस नाजुक राजनीतिक माहौल में किसी भी सरकार के लिए पीछे हटना कमजोरी के रूप में देखा जा सकता है, जिससे संघर्ष के लंबा खिंचने की आशंका बढ़ जाती है। इसके साथ ही यह विवाद अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों को भी अपनी चपेट में ले सकता है।









