ट्रंप का टैरिफ बम: भारत समेत दुनिया में बढ़ी चिंता

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक व्यापार जगत में एक बार फिर हलचल मचा दी है। उन्होंने घोषणा की है कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश पर अमेरिका 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाएगा। यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू होगा और इसे ट्रंप ने “अंतिम और निर्णायक आदेश” करार दिया है।
ट्रंप ने यह ऐलान अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर करते हुए कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ व्यापार करने वाला कोई भी देश अमेरिका के साथ अपने सभी व्यापार पर 25% टैरिफ चुकाएगा। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ईरान में 2009 के बाद सबसे बड़े सरकार विरोधी प्रदर्शन चल रहे हैं।
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, इन प्रदर्शनों पर हिंसक कार्रवाई में अब तक कम से कम 648 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 10,600 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ईरानी सरकार ने इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं और प्रदर्शनकारियों को मौत की सजा तक की चेतावनी दी है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप कूटनीति को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर अमेरिकी सेना की ताकत के इस्तेमाल से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने पिछले साल ईरान के परमाणु ठिकानों पर किए गए अमेरिकी हमलों का भी उल्लेख किया।
भारत पर क्यों है सबसे ज्यादा असर?
भारत ईरान का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार रहा है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-ईरान व्यापार 1.68 अरब डॉलर का रहा। भारत ईरान को चावल, चाय, दवाइयां और कृषि उत्पाद निर्यात करता है, जबकि ईरान से पेट्रोलियम उत्पाद, ड्राई फ्रूट्स और रसायन आयात करता है।
भारत पहले से ही अमेरिकी टैरिफ का सामना कर रहा है। यदि ईरान से व्यापार के कारण अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाया गया, तो भारतीय निर्यात पर कुल शुल्क 75% तक पहुंच सकता है, जिससे भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में महंगा हो जाएगा। इसका सीधा असर किसानों, निर्यातकों और रोजगार पर पड़ सकता है।
वैश्विक व्यापार में बढ़ेगी अनिश्चितता
विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से तेल व्यापार, वैश्विक सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों पर नकारात्मक असर पड़ेगा। चीन, भारत, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के लिए यह फैसला कूटनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर चुनौती बन सकता है।
हालांकि, व्हाइट हाउस ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह टैरिफ कानूनी रूप से कैसे लागू होगा, किन उत्पादों पर प्रभाव पड़ेगा और क्या किसी देश को छूट मिलेगी।
ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच ट्रंप का यह कदम साफ संकेत देता है कि अमेरिका अब ईरान और उसके साझेदार देशों पर अधिकतम दबाव बनाने की नीति पर आगे बढ़ रहा है, जिसका असर आने वाले दिनों में वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई दे सकता है।







