मिडिल ईस्ट में जंग का 9वां दिन: 1230 से ज्यादा मौतें

17 घंटे पहले355
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1230 से ज्यादा मौतें

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मिडिल ईस्ट में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए इस युद्ध को अब नौ दिन हो चुके हैं और क्षेत्र में लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले हो रहे हैं। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अब तक 1,230 से अधिक ईरानी नागरिकों और सैनिकों की मौत हो चुकी है, जबकि कई देशों में हमलों के कारण हताहतों की संख्या बढ़ती जा रही है।

तेहरान में हमले में खामेनेई की मौत

28 फरवरी की सुबह अमेरिका और इजरायल ने ईरान की राजधानी तेहरान में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की उनके परिसर में ही मौत हो गई। इस हमले में उनके परिवार के कई सदस्य और कई वरिष्ठ ईरानी अधिकारी भी मारे गए।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस ऑपरेशन को तेहरान की सरकार को कमजोर करने की रणनीति बताया।

ईरान का जवाबी हमला

खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने तत्काल जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। ईरान ने कुवैत, ओमान, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों में मिसाइल और ड्रोन हमले किए।

1 मार्च: कुवैत में अमेरिकी सैनिकों की मौत

1 मार्च को ईरान ने कुवैत के एक नागरिक बंदरगाह पर बने अस्थायी ऑपरेशन सेंटर को निशाना बनाया। इस हमले में छह अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई।

इसी दिन ओमान के दुक्म बंदरगाह पर भी ड्रोन हमले किए गए और मसंदम तट के पास एक तेल टैंकर पर हमला हुआ।

2 मार्च: दूतावासों पर ड्रोन हमले

2 मार्च को सऊदी अरब और कुवैत में अमेरिकी दूतावासों पर संदिग्ध ईरानी ड्रोन हमले हुए। इससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया।

3 मार्च: दुबई में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास निशाने पर

3 मार्च को दुबई स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर भी ड्रोन हमला हुआ। इसके बाद अमेरिका ने क्षेत्र के तीन देशों में अपने दूतावास बंद कर दिए और नागरिकों को मिडिल ईस्ट छोड़ने की सलाह दी।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के अनुसार 1,500 से अधिक अमेरिकी नागरिकों ने क्षेत्र छोड़ने के लिए सहायता मांगी है।

4 मार्च: समुद्र में बढ़ा संघर्ष

4 मार्च को हिंद महासागर में अमेरिकी पनडुब्बी ने एक ईरानी युद्धपोत को टॉरपीडो से नष्ट कर दिया। इस हमले में 80 से अधिक लोगों के मारे जाने की आशंका है। श्रीलंका ने युद्धपोत से 32 लोगों को बचाया।

5 और 6 मार्च: यूरोपीय देशों की एंट्री

संघर्ष बढ़ने के साथ यूरोपीय देश भी अपने सहयोगियों की मदद के लिए सैन्य सहायता भेजने लगे।

इसी दौरान इजरायल ने तेहरान में कई सरकारी और सैन्य ठिकानों पर बड़े हमले किए, जबकि लेबनान की राजधानी बेरूत में हिजबुल्लाह के ठिकानों को भी निशाना बनाया गया।

7 मार्च: दुबई पर ड्रोन हमला

ताजा घटनाक्रम में दुबई पर ईरानी ड्रोन हमले में एक पाकिस्तानी नागरिक की मौत की पुष्टि हुई है। इससे यूएई जैसे अपेक्षाकृत शांत क्षेत्रों में भी सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं।

ट्रंप का सख्त बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कहा है कि ईरान के साथ बिना शर्त आत्मसमर्पण के अलावा कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका और इजरायल के हमलों से ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान हुआ है।

यूएन ने जताई चिंता

संयुक्त राष्ट्र ने इस संघर्ष को बेहद खतरनाक बताते हुए चेतावनी दी है कि यदि तुरंत कूटनीतिक प्रयास नहीं किए गए तो यह युद्ध नियंत्रण से बाहर जा सकता है और पूरे क्षेत्र को बड़ी तबाही में धकेल सकता है।

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