Neeraj Chopra: भाला फेंक के बादशाह की प्रेरक कहानी: "नीरज चोपड़ा: संघर्ष से ओलंपिक स्वर्ण तक की प्रेरक यात्रा"

युवा खिलाड़ियों के रोल मॉडल
नीरज चोपड़ा—एक ऐसा नाम जिसने भारत के एथलेटिक्स इतिहास को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। आज दुनिया उन्हें ‘गोल्डन बॉय’ कहती है, लेकिन इस चमक के पीछे संघर्ष, अनुशासन और अदम्य आत्मविश्वास की लंबी कहानी छिपी है।
हरियाणा के छोटे से गांव खंडरा में जन्मे नीरज बचपन में बेहद शर्मीले और शांत स्वभाव के थे। लोकल मैदान में जब उन्होंने पहली बार भाला फेंकते खिलाड़ियों को देखा, तभी उनके अंदर एक नई जिज्ञासा पैदा हुई। मोटापे को लेकर शुरुआत में उन्हें कई बार चिढ़ाया भी गया, लेकिन परिवार ने उनका साथ दिया और उन्होंने खेल मैदान का रुख किया।
धीरे-धीरे भाला फेंक के प्रति उनका लगाव बढ़ता गया। साधारण सुविधाओं, सीमित संसाधनों और छोटे गांव के माहौल के बावजूद नीरज ने अपनी मेहनत को कम नहीं होने दिया। सुबह चार बजे उठकर अभ्यास करना, सख्ती से डाइट फॉलो करना और हर थ्रो को पिछले से बेहतर बनाने का प्रयास—यही उनकी रोज़मर्रा की दिनचर्या बन गई।
उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ 2021 में आया, जब उन्होंने टोक्यो ओलंपिक में भाला फेंक में भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल जीता। यह उपलब्धि न सिर्फ उनके लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का ऐतिहासिक पल बन गई।






