"लेडी साइको किलर: 'पूनम पर था युवक का साया": ‘तंत्र-मंत्र और हत्या की कहानी का सच'

हाल ही में राजधानी नई दिल्ली में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने न केवल पुलिस और परिवार को उलझन में डाला है, बल्कि समाज में अंधविश्वास, मानसिक स्वास्थ्य और महिलाओं के चरित्र हनन जैसी संवेदनशील बहसों को भी जन्म दिया है। यह सनसनीखेज मामला एक महिला पूनम पर लगाए गए “लेडी साइको किलर” और “तंत्र–मंत्र” के आरोपों से जुड़ा है। मामला तब सुर्खियों में आया जब सास ने अपने दामाद पर आरोप लगाया कि उसके जीवन पर उनके घर की बहू पूनम का नकारात्मक प्रभाव है, और उसके खिलाफ तंत्र-मंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है।
सास ने दावा किया कि दामाद हमेशा पूनम के प्रभाव में रहता है और यह स्थिति उनके परिवार के लिए खतरा पैदा कर रही है। उनका कहना था कि यह सब केवल तंत्र-मंत्र के कारण ही संभव हुआ है। हालांकि, इस मामले में दामाद ने अपने पक्ष में बयान दिया। दामाद का कहना है कि ये आरोप निराधार हैं और उनके जीवन में कोई तंत्र-मंत्र का असर नहीं है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि सास के दावे का कोई वैज्ञानिक या तार्किक आधार नहीं है।
सामाजिक बहस: “बिना जांच के महिलाओं को गलत नाम क्यों दिया जाता है?”
इस घटना ने समाज में एक गहरी बहस छेड़ दी है, कई सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि:
महिलाओं के चरित्र पर संदेह करने की प्रवृत्ति अब भी समाज में गहराई से मौजूद है।
अक्सर वैज्ञानिक सोच की जगह मिथकों और अंधविश्वासों पर भरोसा कर लिया जाता है।
ऐसे मामलों में “तंत्र–मंत्र” जैसे शब्द भावनाओं को भड़काते हैं और सच छिप जाता है।
इस पूरे मामले ने समाज में यह बहस भी छेड़ दी है कि क्या महिलाओं को साइको किलर और तंत्र-मंत्र जैसी अफवाहों के माध्यम से बदनाम किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में हमेशा तथ्य और सबूत पर ध्यान देना चाहिए, न कि अंधविश्वास और अफवाहों पर।






