वंदे मातरम’ के 150 वर्ष: अब 6 अंतरे अनिवार्य

अब 6 अंतरे अनिवार्य
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केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के गायन और वादन को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। गृह मंत्रालय द्वारा 28 जनवरी को जारी आदेश की जानकारी 11 फरवरी को सार्वजनिक हुई। नए प्रोटोकॉल के अनुसार अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और कई औपचारिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम’ बजाना अनिवार्य होगा, और इस दौरान सभी लोगों को सावधान मुद्रा में खड़ा रहना होगा।

अब पूरे 6 अंतरे गाए जाएंगे, समय तय – 3 मिनट 10 सेकंड
नए नियमों के तहत राष्ट्रगीत के सभी 6 अधिकृत अंतरे गाए जाएंगे। अब तक सामान्यतः पहले दो अंतरे ही गाए जाते थे, जिनकी अवधि लगभग 65 सेकंड थी। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि आधिकारिक संस्करण ही प्रस्तुत किया जाएगा और इसे सामूहिक रूप से सम्मानपूर्वक गाया जाएगा।

राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत साथ होने पर क्या होगा?
आदेश के अनुसार, यदि किसी कार्यक्रम में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ दोनों गाए या बजाए जाते हैं, तो पहले ‘वंदे मातरम’ प्रस्तुत किया जाएगा, उसके बाद राष्ट्रगान।

स्कूलों में दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत से
सरकार ने निर्देश दिया है कि देशभर के सभी स्कूलों में दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन से की जाएगी। इससे पूरे देश में एक समान परंपरा और राष्ट्रीय भावना को बढ़ावा देने का उद्देश्य बताया गया है।

किन-किन अवसरों पर अनिवार्य होगा वादन?
नई गाइडलाइन के अनुसार ‘वंदे मातरम’ इन मौकों पर अनिवार्य होगा:
तिरंगा फहराने के समय,
राष्ट्रपति के आगमन और प्रस्थान पर,
राष्ट्र के नाम राष्ट्रपति के संबोधन से पहले और बाद में,
राज्यपाल/उपराज्यपाल के औपचारिक कार्यक्रमों में आगमन-प्रस्थान पर,
सिविलियन पुरस्कार समारोह (जैसे पद्म पुरस्कार),
सरकारी एवं सार्वजनिक महत्वपूर्ण समारोहों में,
हालांकि, मंत्रालय ने यह भी कहा है कि हर संभावित अवसर की सूची देना संभव नहीं है।

सिनेमा हॉल को मिली छूट
नए नियम सिनेमा हॉल पर लागू नहीं होंगे। फिल्म शुरू होने से पहले ‘वंदे मातरम’ बजाना या खड़ा होना अनिवार्य नहीं होगा। यदि किसी न्यूजरील या डॉक्यूमेंट्री में राष्ट्रगीत का उपयोग होता है, तो दर्शकों के लिए खड़ा होना जरूरी नहीं होगा ताकि प्रदर्शन में व्यवधान न हो।

वंदे मातरम का इतिहास: 1875 से आज तक
लेखक: बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय,
रचना तिथि: 7 नवंबर 1875,
प्रकाशन: 1882 में उपन्यास आनंदमठ में,
पहला सार्वजनिक गायन: 1896, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अधिवेशन (रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा),
राष्ट्रगीत घोषित: 26 जनवरी 1950,
‘वंदे मातरम्’ संस्कृत वाक्यांश है, जिसका अर्थ है – हे मां, मैं तुम्हें नमन करता हूं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह आजादी का प्रमुख नारा बना।

150 वर्ष पूरे होने पर विशेष आयोजन
केंद्र सरकार इस वर्ष ‘वंदे मातरम’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रही है। 77वें गणतंत्र दिवस परेड (कर्तव्य पथ, दिल्ली) की थीम भी ‘वंदे मातरम’ रही। संस्कृति मंत्रालय की झांकी को बेस्ट झांकी का पुरस्कार मिला।

संसद में हुआ था विवाद
शीतकालीन सत्र के दौरान इस मुद्दे पर लोकसभा और राज्यसभा में करीब 10 घंटे बहस हुई। भाजपा ने कांग्रेस पर ऐतिहासिक निर्णयों को लेकर आरोप लगाए। कांग्रेस ने सरकार पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया। पीएम मोदी ने बहस के दौरान ‘वंदे मातरम’ 121 बार कहा। 1937 में कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने मूल 6 पैरा में से 4 हटाने का फैसला लिया था, जिसे लेकर आज भी राजनीतिक बहस जारी है।

छह अनिवार्य छंदों का भावार्थ
नए प्रोटोकॉल में शामिल 6 छंदों में भारत की: प्राकृतिक समृद्धि (सुजलाम् सुफलाम्), शक्ति और साहस, संस्कृति और आध्यात्मिक पहचान, दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती के प्रतीकात्मक रूप, मातृभूमि की रक्षा और सम्मान, का वर्णन है।
सरकार का कहना है कि इससे राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक गौरव को मजबूती मिलेगी।

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