28 साल बाद सारनाथ को UNESCO का सम्मान: सारनाथ बना भारत की 45वीं विश्व धरोहरभारत की सांस्कृतिक विरासत के लिए 26 जुलाई 2026 ऐतिहासिक दिन बन गया। यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में सारनाथ को आधिकारिक रूप से विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया गया। करीब 28 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद मिली इस मान्यता ने भारत की प्राचीन बौद्ध विरासत को वैश्विक पहचान दिलाई है। सारनाथ अब दुनिया भर के सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनेगा। यह उपलब्धि भारतीय इतिहास, संस्कृति और बौद्ध दर्शन के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है। उत्तर प्रदेश का चौथा यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल बना सारनाथ सारनाथ के विश्व धरोहर बनने के साथ उत्तर प्रदेश को एक और ऐतिहासिक उपलब्धि मिली है। ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी के बाद अब सारनाथ राज्य का चौथा यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल बन गया है। इससे प्रदेश में बौद्ध पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इससे रोजगार, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलेगा। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। धमेख स्तूप से अशोक स्तंभ तक मिला वैश्विक संरक्षण यूनेस्को की मान्यता के तहत सारनाथ का पूरा पुरातात्विक परिसर संरक्षित रहेगा। इसमें धमेख स्तूप, चौखंडी स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, अशोक स्तंभ और पुरातात्विक संग्रहालय परिसर शामिल हैं। यही वह पवित्र स्थल है जहां भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश दिया था। सम्राट अशोक द्वारा निर्मित स्मारक और राष्ट्रीय प्रतीक अशोक सिंह स्तंभ भी इसी परिसर का हिस्सा हैं। इस फैसले से इन ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन को नई मजबूती मिलेगी।