‘फ्रीबीज कल्चर’ पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: राज्यों की वित्तीय सेहत पर सवाल

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राज्यों की वित्तीय सेहत पर सवाल

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Supreme Court of India ने गुरुवार को चुनाव से पहले राज्य सरकारों द्वारा ‘फ्रीबीज’ (मुफ्त सुविधाओं) की घोषणा करने की प्रवृत्ति पर कड़ी मौखिक टिप्पणी की। कोर्ट ने पूछा— “चुनाव आते ही योजनाएं क्यों घोषित होती हैं? यह टेंडेंसी कब तक चलेगी?”
मुख्य न्यायाधीश CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने कहा कि अगर सरकारें सुबह से शाम तक मुफ्त खाना, गैस और बिजली देती रहेंगी, तो लोग काम क्यों करेंगे? सरकारों को रोजगार सृजन पर फोकस करना चाहिए।

तमिलनाडु बिजली मामले में सुनवाई
यह टिप्पणी ‘Tamil Nadu Power Distribution Corporation Limited बनाम भारत संघ’ मामले की सुनवाई के दौरान की गई। कंपनी ने 2024 के विद्युत संशोधन नियमों के नियम 23 को चुनौती दी है, जिसमें उपभोक्ताओं की आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना सभी को मुफ्त बिजली देने का प्रस्ताव है।
कोर्ट ने सवाल उठाया—
बिजली दरों की घोषणा के बाद अचानक मुफ्त बिजली क्यों?
भुगतान करने में सक्षम और अक्षम उपभोक्ताओं में फर्क क्यों नहीं?

CJI सूर्यकांत के 3 अहम कमेंट
(1) रोजगार के अवसर बनाइए, ताकि लोग सम्मान से कमा सकें। (2) चुनाव के आसपास ही योजनाएं क्यों घोषित होती हैं? (3) क्या बिना भेदभाव के सबको मुफ्त सुविधा देना तुष्टीकरण नहीं है?

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