BJP Protest in Varanasi: वाराणसी एमएलसी चुनाव में बीजेपी का धरना, पर्यवेक्षक को लेकर भ्रमवाराणसी एमएलसी चुनाव की मतगणना पर विवाद उत्तर प्रदेश के वाराणसी खंड स्नातक विधान परिषद चुनाव की मतगणना के दौरान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने गिनती की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। उस समय की रिपोर्ट के अनुसार, समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा प्रथम वरीयता के आठवें चक्र की मतगणना के बाद बीजेपी प्रत्याशी केदारनाथ सिंह से 16,261 वोटों से आगे चल रहे थे। बीजेपी ने पांचवें चक्र की मतगणना दोबारा कराने की मांग की थी। पांचवें चक्र की गिनती पर उठाए सवाल रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार रात बीजेपी के नेता, प्रत्याशी, प्रदेश सरकार के मंत्री, विधायक, मेयर और पार्टी कार्यकर्ता मतगणना स्थल पर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पांचवें चक्र की मतगणना के दौरान बीजेपी के एजेंट मौजूद नहीं थे और गिनती सपा के एजेंट की मौजूदगी में हुई। इसी आधार पर उन्होंने दोबारा मतगणना कराने की मांग उठाई और निर्वाचन आयोग के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई। पांच घंटे चला धरना, पर्यवेक्षक के खिलाफ नारेबाजी धरने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और प्रांजल यादव के खिलाफ नारेबाजी की। कुछ प्रदर्शनकारियों ने प्रांजल यादव को अखिलेश यादव का रिश्तेदार बताते हुए उन्हें पर्यवेक्षक पद से हटाने की मांग भी की। रिपोर्ट के अनुसार, धरना करीब पांच घंटे तक चला और रात नौ बजे समाप्त हुआ। पर्यवेक्षक को लेकर सामने आया भ्रम इस मामले में एक अहम सवाल यह उठा कि वाराणसी खंड स्नातक सीट की मतगणना के पर्यवेक्षक कौन थे। रिपोर्ट में दावा किया गया कि बीजेपी प्रत्याशी केदारनाथ सिंह को इस पद पर नियुक्त अधिकारी के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं थी। खबर के मुताबिक, प्रांजल यादव शिक्षक खंड के पर्यवेक्षक थे, जबकि स्नातक खंड के लिए जीसी प्रियदर्शी पर्यवेक्षक बताए गए। इस अंतर को लेकर प्रदर्शन और प्रत्याशी के बयानों पर सवाल उठे।