पार्क में युवाओं से पूछताछ करती दिखीं पार्षद: पार्क में बिना पुलिस पूछताछ पर मचा बवाल

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ईस्ट दिल्ली के कोंडली वॉर्ड से बीजेपी की पार्षद मुनेष डेढ़ा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में पार्षद बिना पुलिस की मौजूदगी के एक पार्क में युवाओं से पूछताछ करती नजर आ रही हैं। इस दौरान उनके साथ कुछ कार्यकर्ता भी मौजूद थे। वीडियो को लेकर अब सियासी और सामाजिक बहस तेज हो गई है।
कपल को डांटकर आईडी चेक, पुलिस में देने की धमकी
वीडियो में देखा जा सकता है कि रात के समय पार्षद पार्क में बैठी एक युवक-युवती से सवाल-जवाब करती हैं। वह उनसे पूछती हैं कि वे कहां रहते हैं और उनकी पहचान पत्र (ID) भी चेक करती हैं। पार्षद कहती हैं, “तुम अशोक नगर के हो तो यहां क्या करने आए हो? वहां पार्क नहीं है क्या?”
इसके बाद वह चेतावनी देती हैं कि अगर पार्क में किसी को “अभद्र हालत” में पाया गया, तो अगली बार मौके पर ही फैसला किया जाएगा।
नाबालिग होने पर भी सख्त रवैया
जब युवक-युवती यह बताते हैं कि उनकी उम्र 15 साल है, तब भी पार्षद का रवैया नरम नहीं पड़ता। वह कहती हैं, “15 के हो तो क्या तुम्हारे तेवर चेंज हो जाते हैं?”
इसके बाद वह पार्क में मौजूद अन्य लड़के-लड़कियों से भी पूछताछ करती नजर आती हैं।
विवाद बढ़ने पर पार्षद की सफाई
मामले के तूल पकड़ने के बाद मुनेष डेढ़ा ने सफाई देते हुए कहा कि वह रात में पार्क का निरीक्षण करने गई थीं। उन्हें स्थानीय लोगों से शिकायत मिली थी कि पार्क में बच्चे गांजा पीते हैं और देर रात तक वहां रहते हैं।
उन्होंने कहा कि पार्क में लाइटिंग नहीं है और अंधेरा रहता है, इसलिए वह वहां लाइट लगवाने की व्यवस्था देखने गई थीं। पार्षद के अनुसार, वहां मौजूद कुछ लड़कियां काफी देर से घर से बाहर थीं और एक मां ने बताया कि उनकी बेटी एक तारीख से गायब थी।
बीजेपी महिला मोर्चा ने किया बचाव
बीजेपी महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष ऋचा पांडे मिश्रा ने मुनेष डेढ़ा का बचाव करते हुए कहा कि उनकी मंशा गलत नहीं थी। हालांकि उन्होंने सलाह दी कि भविष्य में इस तरह के निरीक्षण या कार्रवाई स्थानीय पुलिस की मौजूदगी में ही की जानी चाहिए।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
गौरतलब है कि पिछले महीने पटपड़गंज से बीजेपी की निगम पार्षद रेणु चौधरी का भी एक विवादित वीडियो सामने आया था। उस वीडियो में उन्होंने पार्क में बच्चों को फुटबॉल सिखाने वाले अफ्रीकी मूल के कोच को एक महीने में हिंदी सीखने की चेतावनी दी थी, जिस पर काफी विवाद हुआ था।

