सफलता के शिखर से विवादों के भंवर तक: जानिए 'चॉक' से साम्राज्य खड़ा करने वाले खान सर उर्फ फैजल खान की पूरी इनसाइड स्टोरीयह कहानी उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले (भाटपार रानी) में जन्मे एक साधारण परिवार के लड़के फैजल खान की है, जिसे आज पूरी दुनिया 'खान सर' के नाम से जानती है। पिता बशीर खान सेना में थे और भाई खुद एक कमांडो हैं, इसलिए देशसेवा का जज्बा फैजल के खून में था। उन्होंने एनडीए (NDA) की परीक्षा भी पास कर ली थी, लेकिन फिजिकल फिटनेस के दौरान हाथ में एक मामूली झुकाव (Minor Tilt) के कारण उन्हें मेडिकल रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। सेना में जाकर देश के लिए मर-मिटने का सपना भले ही टूट गया, लेकिन फैजल ने हार नहीं मानी। उन्होंने राइफल की जगह चॉक और मार्कर उठाया और शिक्षा को ही अपना मिशन बना लिया। मात्र 40 छात्रों से 'चलती-फिरती यूनिवर्सिटी' बनने का सफर साल 2010 में पटना के मुसल्लहपुर हाट में एक छोटे से कमरे और महज 40 छात्रों के साथ खान सर ने अपनी कोचिंग की शुरुआत की थी। शुरुआती दिनों में संघर्ष इतना बड़ा था कि वे खुद दीवारों पर कोचिंग के पोस्टर चिपकाया करते थे। अपनी जीविका और संस्थान को चलाने के लिए उन्होंने वेल्डिंग का काम किया और जेसीबी तक चलाई। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से बीएससी और भूगोल में एमए करने वाले खान सर का पढ़ाने का अंदाज सबसे जुदा था। जटिल से जटिल जियोपॉलिटिक्स, स्पेस साइंस या इतिहास को पटना की देसी भाषा, भोजपुरी के तड़के और 'लिट्टी-चोखा' व 'सत्तू' के उदाहरणों से समझा देने की उनकी कला ने उन्हें लोकप्रिय बना दिया। साल 2019 में उन्होंने यूट्यूब पर कदम रखा और 'Khan GS Research Centre' की शुरुआत की। देखते ही देखते डिजिटल दुनिया में उनकी ऐसी आंधी आई कि बड़े-बड़े एड-टेक (Edu-tech) दिग्गजों के सिंहासन हिल गए। आज उनके यूट्यूब चैनल 'खान ग्लोबल स्टडीज' पर 2.59 करोड़ (25.9M) से ज्यादा सब्सक्राइबर्स हैं और उनके व्यूज अरबों में हैं।