चुनाव आयोग नागरिकता तय करने वाली संस्था नहीं: SC: राशन रोकना गलत, चुनाव आयोग को फटकार
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा संदेश: वोटर लिस्ट से नाम हटने का मतलब नागरिकता खत्म नहीं, राशन-योजनाएं रोकना भी गलत,सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता पर दिया बड़ा स्पष्टीकरण नई दिल्ली में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने विशेष गहन संशोधन (SIR) से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने स्पष्ट कहा कि मतदाता सूची से नाम हटने का अर्थ किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता समाप्त होना नहीं है। कोर्ट ने कहा कि वोटर सूची केवल चुनावी प्रक्रिया का रिकॉर्ड है, नागरिकता का प्रमाण नहीं। चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र पर कोर्ट की टिप्पणी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग (ECI) का कार्य केवल मतदाता सूची तैयार करना और उसका प्रबंधन करना है। किसी नागरिक की वैध नागरिकता तय करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास नहीं है। यदि किसी व्यक्ति की नागरिकता को लेकर संदेह उत्पन्न होता है तो आयोग केवल संबंधित मामला केंद्र सरकार के सक्षम प्राधिकरण के पास भेज सकता है। राशन और सरकारी योजनाएं रोकने पर जताई चिंता अदालत ने इस बात पर गंभीर चिंता व्यक्त की कि वोटर लिस्ट से नाम हटने के आधार पर कुछ लोगों को राशन, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से वंचित किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि किसी प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण नागरिकों के सामाजिक और संवैधानिक अधिकार प्रभावित नहीं होने चाहिए। ऐसे कदम संविधान की भावना के अनुरूप नहीं हैं।