सिर्फ आज नहीं, कल के भारत की सोचिए': पीएम मोदी ने की तीसरी हाई लेवल मीटिंगप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत सरकार के विभिन्न विभागों के सचिवों के साथ तीसरी उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में देश के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण और रणनीतिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से तत्काल चुनौतियों और मौजूदा आंकड़ों से आगे बढ़कर भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजना बनाने को कहा। उन्होंने बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी, सुरक्षा, विदेश मामलों और सुशासन जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने पर जोर दिया। बैठक में अलग-अलग मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल और साझा प्रयासों की जरूरत पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से भविष्य के भारत के लिए स्पष्ट विजन के साथ काम करने का आह्वान किया। मंत्रालयों के बीच तालमेल पर जोर प्रधानमंत्री मोदी ने सरकारी विभागों के बीच काम करने के तरीके में बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग विभागों का अपने-अपने दायरे में सीमित होकर काम करना केवल संगठनात्मक समस्या नहीं बल्कि मानसिकता से जुड़ा विषय भी है। प्रधानमंत्री ने कोरोना महामारी और पश्चिम एशिया संकट जैसे उदाहरणों का उल्लेख करते हुए सामूहिक प्रयासों की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि संकट के समय जिस तरह विभिन्न विभाग मिलकर काम करते हैं, उसी तरह सामान्य परिस्थितियों में भी यह कार्य संस्कृति का हिस्सा होना चाहिए। अधिकारियों से अपनी जिम्मेदारियों का स्वामित्व लेने और एक टीम की तरह काम करने की अपील की गई। सरकार के अलग-अलग हिस्सों के बीच बेहतर तालमेल से नीतियों और योजनाओं के क्रियान्वयन को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। डेटा और AI के इस्तेमाल पर विशेष जोर बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बेहतर इस्तेमाल को लेकर भी अपना विजन सामने रखा। उन्होंने डेटा को भविष्य के लिए महत्वपूर्ण संसाधन और राष्ट्रीय संपत्ति बताते हुए विभागों के बीच बेहतर डेटा शेयरिंग की जरूरत बताई। प्रधानमंत्री ने कहा कि उपलब्ध आंकड़ों का सही इस्तेमाल नीतियों को अधिक प्रभावी और परिणाम आधारित बनाने में मदद कर सकता है। उन्होंने सरकारी विभागों में AI के उपयोग को बढ़ाने पर भी जोर दिया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि AI की क्षमताओं के साथ मानवीय अनुभव, निर्णय क्षमता और निगरानी का महत्व बना रहना चाहिए। तकनीक और मानवीय विशेषज्ञता के संतुलित इस्तेमाल से शासन व्यवस्था को और बेहतर बनाने पर चर्चा हुई।