The Iron Balance: लोहे का तराजू: लालची साहूकार को व्यापारी ने सिखाया सबकलोहे का तराजू: लालच और झूठ की कहानी एक बार एक व्यापारी को व्यापार के सिलसिले में दूसरे देश जाना था। यात्रा के लिए उसे पैसों की जरूरत पड़ी, इसलिए वह एक साहूकार के पास गया और उससे कुछ रुपये उधार लिए। बदले में व्यापारी ने अपना लोहे का तराजू साहूकार के पास गिरवी रख दिया। कुछ समय बाद व्यापारी यात्रा से लौट आया और साहूकार को उधार लिए हुए रुपये वापस कर दिए। इसके बाद उसने अपना तराजू वापस मांगा, लेकिन लालच में डूबे साहूकार ने उसे लौटाने के बजाय बहाना बना दिया। उसने कहा कि उसकी दुकान में बहुत सारे चूहे हैं और चूहे व्यापारी का लोहे का तराजू खा गए। व्यापारी समझ गया कि साहूकार झूठ बोल रहा है, लेकिन उसने उस समय बहस करने के बजाय अपनी बुद्धि से समस्या का हल निकालने का फैसला किया। व्यापारी ने साहूकार को उसी की चाल में फंसाया व्यापारी ने साहूकार से कहा कि कोई बात नहीं, वह उसके लिए रेशम के कुछ थान लाया है। फिर उसने पूछा कि क्या साहूकार अपने बेटे को उसके साथ भेज सकता है, ताकि वह कपड़ों के थान लेकर वापस आ जाए। रेशम का नाम सुनते ही लालची साहूकार खुश हो गया और उसने बिना ज्यादा सोचे अपने बेटे को व्यापारी के साथ भेज दिया। व्यापारी लड़के को एक गुफा के पास ले गया और बोला कि उसका सामान अंदर रखा है, जहां से वह दो थान निकाल सकता है। जैसे ही लड़का गुफा के भीतर गया, व्यापारी ने बाहर से उसका दरवाजा बंद कर दिया। इस तरह व्यापारी ने साहूकार को उसके झूठ का एहसास कराने के लिए एक योजना बनाई।