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सकारात्मक समाचार

26 जनवरी 1950: ब्रिटिश प्रतीकों से आज़ाद होकर अशोक स्तंभ बना राष्ट्रीय चिन्ह

सकारात्मक समाचार
ब्रिटिश प्रतीकों से आज़ाद होकर अशोक स्तंभ बना राष्ट्रीय चिन्ह
ब्रिटिश प्रतीकों से आज़ाद होकर अशोक स्तंभ बना राष्ट्रीय चिन्ह

26 जनवरी 1950: ब्रिटिश प्रतीकों से आज़ाद होकर अशोक स्तंभ बना राष्ट्रीय चिन्ह

सकारात्मक समाचार

भारत की आज़ादी की 10 अनसुनी कहानियां: आज़ादी सिर्फ नेताओं की नहीं

सकारात्मक समाचार
आज़ादी सिर्फ नेताओं की नहीं
भारत की आज़ादी की 10 अनसुनी कहानियां: आज़ादी सिर्फ नेताओं की नहीं
सकारात्मक समाचार
आज़ादी सिर्फ नेताओं की नहीं

भारत 15 अगस्त को आज़ाद: जानिए इस ऐतिहासिक तारीख का पूरा सच

सकारात्मक समाचार
जानिए इस ऐतिहासिक तारीख का पूरा सच
भारत 15 अगस्त को आज़ाद: जानिए इस ऐतिहासिक तारीख का पूरा सच
सकारात्मक समाचार
जानिए इस ऐतिहासिक तारीख का पूरा सच

नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती: वह धरती जहाँ से आज़ादी की जंग को मिली नई दिशा

सकारात्मक समाचार
वह धरती जहाँ से आज़ादी की जंग को मिली नई दिशा
नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती: वह धरती जहाँ से आज़ादी की जंग को मिली नई दिशा
सकारात्मक समाचार
वह धरती जहाँ से आज़ादी की जंग को मिली नई दिशा

भारतीय सैन्य इतिहास का स्वर्णिम दिन: वर्दी की शान, देश का सम्मान

सकारात्मक समाचार
वर्दी की शान, देश का सम्मान
भारतीय सैन्य इतिहास का स्वर्णिम दिन: वर्दी की शान, देश का सम्मान
सकारात्मक समाचार
वर्दी की शान, देश का सम्मान

आजादी के गुमनाम नायक: स्वतंत्रता संग्राम: केवल प्रसिद्ध नाम नहीं, अनगिनत बलिदानों की गाथा

सकारात्मक समाचार
स्वतंत्रता संग्राम: केवल प्रसिद्ध नाम नहीं, अनगिनत बलिदानों की गाथा
आजादी के गुमनाम नायक: स्वतंत्रता संग्राम: केवल प्रसिद्ध नाम नहीं, अनगिनत बलिदानों की गाथा
सकारात्मक समाचार
स्वतंत्रता संग्राम: केवल प्रसिद्ध नाम नहीं, अनगिनत बलिदानों की गाथा

उम्मीद की किरण: जो निराशा में भी जगाती है आशा

सकारात्मक समाचार
जो निराशा में भी जगाती है आशा
उम्मीद की किरण: जो निराशा में भी जगाती है आशा
सकारात्मक समाचार
जो निराशा में भी जगाती है आशा

विज्ञान और आस्था का अनोखा संगम: मंदिरों में छिपा वास्तुकला और ऊर्जा विज्ञान

सकारात्मक समाचार
मंदिरों में छिपा वास्तुकला और ऊर्जा विज्ञान
विज्ञान और आस्था का अनोखा संगम: मंदिरों में छिपा वास्तुकला और ऊर्जा विज्ञान
सकारात्मक समाचार
मंदिरों में छिपा वास्तुकला और ऊर्जा विज्ञान

क्रिसमस क्यों मनाया जाता है? : ईसा मसीह का जन्म और क्रिसमस का धार्मिक महत्व

सकारात्मक समाचार
ईसा मसीह का जन्म और क्रिसमस का धार्मिक महत्व
क्रिसमस क्यों मनाया जाता है? : ईसा मसीह का जन्म और क्रिसमस का धार्मिक महत्व
सकारात्मक समाचार
ईसा मसीह का जन्म और क्रिसमस का धार्मिक महत्व

भारत के परमाणु पितामह होमी भाभा:: कैसे एक हाइपर-एक्टिव बालक बना भारत की परमाणु शक्ति का शिल्पकार

सकारात्मक समाचार
कैसे एक हाइपर-एक्टिव बालक बना भारत की परमाणु शक्ति का शिल्पकार
कैसे एक हाइपर-एक्टिव बालक बना भारत की परमाणु शक्ति का शिल्पकार

भारत के परमाणु पितामह होमी भाभा:: कैसे एक हाइपर-एक्टिव बालक बना भारत की परमाणु शक्ति का शिल्पकार

सकारात्मक समाचार

“वर्ण बनाम जाति": ' वैदिक समाज में जन्म नहीं, गुण–कर्म से तय होती थी सामाजिक पहचान'

सकारात्मक समाचार
' वैदिक समाज में जन्म नहीं, गुण–कर्म से तय होती थी सामाजिक पहचान'
“वर्ण बनाम जाति": ' वैदिक समाज में जन्म नहीं, गुण–कर्म से तय होती थी सामाजिक पहचान'
सकारात्मक समाचार
' वैदिक समाज में जन्म नहीं, गुण–कर्म से तय होती थी सामाजिक पहचान'

वैदिक दृष्टिकोण से मनुस्मृति: वर्ण परिवर्तन, शिक्ष: जन्मना जाति नहीं, गुण–कर्म आधारित वर्ण व्यवस्था का दर्शन

सकारात्मक समाचार
जन्मना जाति नहीं, गुण–कर्म आधारित वर्ण व्यवस्था का दर्शन
वैदिक दृष्टिकोण से मनुस्मृति: वर्ण परिवर्तन, शिक्ष: जन्मना जाति नहीं, गुण–कर्म आधारित वर्ण व्यवस्था का दर्शन
सकारात्मक समाचार
जन्मना जाति नहीं, गुण–कर्म आधारित वर्ण व्यवस्था का दर्शन

26 जनवरी 1950: ब्रिटिश प्रतीकों से आज़ाद होकर अशोक स्तंभ बना राष्ट्रीय चिन्ह

सकारात्मक समाचार
ब्रिटिश प्रतीकों से आज़ाद होकर अशोक स्तंभ बना राष्ट्रीय चिन्ह
ब्रिटिश प्रतीकों से आज़ाद होकर अशोक स्तंभ बना राष्ट्रीय चिन्ह

26 जनवरी 1950: ब्रिटिश प्रतीकों से आज़ाद होकर अशोक स्तंभ बना राष्ट्रीय चिन्ह

26 जनवरी 1950 की सुबह भारत के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हुई। यह दिन केवल संविधान लागू होने का नहीं था, बल्कि उस दिन भारत ने औपनिवेशिक पहचान को पूरी तरह त्याग कर एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्वयं को स्थापित किया। औपनिवेशिक प्रतीकों का अंत, गणराज्य भारत की शुरुआत उस सुबह सरकारी दफ्तरों, अदालतों और दस्तावेज़ों से ब्रिटिश राज की मुहर मिटा दी गई। सेना की वर्दियों से ‘रॉयल’ शब्द हटाया गया, ब्रिटिश क्राउन उतारा गया और नोटों से महारानी की तस्वीर इतिहास बन गई। ‘God Save the Queen’ की जगह राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को अपनाया गया। यूनियन जैक की जगह तिरंगा पूरे देश में शान से लहराने लगा। सवाल से शुरू हुआ बदलाव 15 अगस्त 1947 को आज़ादी मिलने के बाद भी देश की पहचान में औपनिवेशिक प्रतीक बने हुए थे। संविधान सभा में सवाल उठा— क्या आज़ाद भारत रॉयल क्राउन और ब्रिटिश प्रतीकों के साथ आगे बढ़ेगा? जवाब एकमत था—नहीं। राष्ट्रीय प्रतीक को लेकर बहस राष्ट्रीय प्रतीक के लिए कई सुझाव आए— धार्मिक प्रतीक जैसे धर्मचक्र, गाय, ओम (ॐ), आधुनिक प्रतीक जैसे फैक्ट्री, ग्लोब, बिजली, डैम, हाथ मिलाना। लेकिन नेहरू, पटेल और डॉ. अंबेडकर ने स्पष्ट किया कि प्रतीक स्वदेशी, सभ्यतागत और धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए।

सकारात्मक समाचार

भारत की आज़ादी की 10 अनसुनी कहानियां: आज़ादी सिर्फ नेताओं की नहीं

सकारात्मक समाचार
आज़ादी सिर्फ नेताओं की नहीं
भारत की आज़ादी की 10 अनसुनी कहानियां: आज़ादी सिर्फ नेताओं की नहीं

भारत की आज़ादी का संघर्ष लंबा, कठिन और बलिदानों से भरा रहा। यह केवल कुछ गिने-चुने बड़े नेताओं की कहानी नहीं है, बल्कि यह देश के हर कोने से उठी आवाज़ों, अनगिनत कुर्बानियों और गुमनाम नायकों की गाथा है। किसान, महिलाएं, बच्चे, मजदूर और आम नागरिक—सबने मिलकर अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी थी। जब हम देश आज़ाद होने का जश्न मनाते है, तो यह जरूरी हो जाता है कि हम उन कहानियों को भी याद करें, जो इतिहास की किताबों में कम ही जगह बना पाईं। आइए जानते हैं भारत की आज़ादी से जुड़ी ऐसी ही 10 अनसुनी और प्रेरणादायक कहानियां। 1. पूना पैक्ट से पहले यरवदा जेल की ऐतिहासिक भूख हड़ताल साल 1932 में ब्रिटिश सरकार ने दलितों के लिए अलग निर्वाचन मंडल (Separate Electorate) की घोषणा की। इस फैसले का महात्मा गांधी ने कड़ा विरोध किया। उनका मानना था कि इससे भारतीय समाज और अधिक विभाजित हो जाएगा। इसी विरोध में गांधीजी ने पुणे की यरवदा जेल में आमरण अनशन शुरू कर दिया। वहीं, डॉ. भीमराव अंबेडकर दलितों के राजनीतिक अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए इस व्यवस्था के पक्ष में थे। पूरे देश की निगाहें इस टकराव पर टिक गईं। आखिरकार, दोनों महान नेताओं के बीच समझौता हुआ, जिसे पूना पैक्ट के नाम से जाना गया। इसके तहत दलितों को आरक्षित सीटें मिलीं, लेकिन अलग निर्वाचन मंडल की व्यवस्था खत्म कर दी गई। 2. काकोरी कांड के गुमनाम क्रांतिकारी काकोरी ट्रेन कांड का नाम आते ही राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां और राजेंद्र लाहिड़ी याद आते हैं। लेकिन इस ऐतिहासिक क्रांति में कई ऐसे युवा भी शामिल थे, जिनके नाम इतिहास के पन्नों में खो गए। इन युवाओं ने अंग्रेजी सरकार की आर्थिक रीढ़ तोड़ने के लिए जान की बाजी लगाई। कई को लंबी कैद, यातनाएं और फांसी तक झेलनी पड़ी। बावजूद इसके, उन्हें वह पहचान नहीं मिल सकी जिसके वे हकदार थे।

सकारात्मक समाचार
आज़ादी सिर्फ नेताओं की नहीं

भारत 15 अगस्त को आज़ाद: जानिए इस ऐतिहासिक तारीख का पूरा सच

सकारात्मक समाचार
जानिए इस ऐतिहासिक तारीख का पूरा सच
भारत 15 अगस्त को आज़ाद: जानिए इस ऐतिहासिक तारीख का पूरा सच

भारत के इतिहास में 15 अगस्त 1947 और 26 जनवरी 1950 —दोनों तारीखें बेहद अहम हैं। 15 अगस्त को देश को आज़ादी मिली, लेकिन भारत को उसकी असली पहचान 26 जनवरी को मिली, जब वह एक संपूर्ण लोकतांत्रिक गणतंत्र बना। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि जब भारत 1947 में आज़ाद हो गया था, तो फिर 26 जनवरी 1950 को ही गणतंत्र दिवस क्यों मनाया जाता है? आइए, इस सवाल का जवाब इतिहास के पन्नों से समझते हैं। 15 अगस्त 1947: आज़ादी मिली, लेकिन गणतंत्र नहीं बना भारत 15 अगस्त 1947 को भारत ने लगभग 200 साल की ब्रिटिश गुलामी से मुक्ति पाई। हालांकि, इस दिन भारत पूरी तरह स्वतंत्र गणतंत्र नहीं बना था। उस समय भारत का औपचारिक राष्ट्राध्यक्ष ब्रिटेन का राजा ही था और देश का शासन गवर्नर जनरल के माध्यम से चलाया जा रहा था। भारत को वास्तविक संप्रभुता और आत्मनिर्णय का अधिकार तब मिला, जब देश को अपना खुद का संविधान प्राप्त हुआ। जब तक संविधान लागू नहीं हुआ, तब तक भारत एक स्वतंत्र लेकिन अधूरा लोकतंत्र था। 26 जनवरी 1930: ‘पूर्ण स्वराज’ का ऐतिहासिक संकल्प 26 जनवरी की तारीख भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में बेहद खास रही है। 26 जनवरी 1930 को लाहौर में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में ‘पूर्ण स्वराज’ की ऐतिहासिक घोषणा की गई थी। इस अधिवेशन की अध्यक्षता पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी। यहीं पहली बार कांग्रेस ने अंग्रेजों से डोमिनियन स्टेटस यानी अर्ध-स्वतंत्रता की मांग को खारिज कर दिया और साफ कहा— भारत अब अधूरी नहीं, पूरी आज़ादी चाहता है।

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती: वह धरती जहाँ से आज़ादी की जंग को मिली नई दिशा

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वह धरती जहाँ से आज़ादी की जंग को मिली नई दिशा
नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती: वह धरती जहाँ से आज़ादी की जंग को मिली नई दिशा

आज 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर देश उनके अदम्य साहस और क्रांतिकारी विरासत को नमन कर रहा है। इस अवसर पर झारखंड से उनके गहरे और ऐतिहासिक जुड़ाव को भी याद किया जा रहा है, जहाँ 1928 से 1941 के बीच उन्होंने जमशेदपुर, धनबाद, रामगढ़ और रांची जैसे क्षेत्रों में स्वतंत्रता संग्राम और मजदूर आंदोलनों को नई दिशा दी। रामगढ़ की ‘एंटी-कॉम्प्रोमाइज कॉन्फ्रेंस’ से लेकर गोमो स्टेशन से हुआ उनका ऐतिहासिक पलायन, नेताजी की यह धरती अंग्रेजों के खिलाफ निर्णायक संघर्ष की साक्षी बनी। झारखंड में मौजूद उनके स्मारक आज भी उनकी निडर सोच, त्याग और राष्ट्रभक्ति की कहानी कहते हैं। इन यात्राओं का उद्देश्य केवल भाषण देना नहीं था, बल्कि मजदूर आंदोलनों को संगठित करना और अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जनचेतना फैलाना था। मजदूर आंदोलनों और ‘एंटी-कॉम्प्रोमाइज कॉन्फ्रेंस’ की भूमिका रामगढ़ में आयोजित ‘एंटी-कॉम्प्रोमाइज कॉन्फ्रेंस’ नेताजी की क्रांतिकारी सोच का प्रतीक रही। वे समझौते की राजनीति के खिलाफ थे और मानते थे कि बिना निर्णायक संघर्ष के आज़ादी संभव नहीं। यही वजह थी कि मजदूर यूनियन लीडर्स और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े नेता लगातार उनके संपर्क में रहते थे।

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वह धरती जहाँ से आज़ादी की जंग को मिली नई दिशा
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भारतीय सैन्य इतिहास का स्वर्णिम दिन: वर्दी की शान, देश का सम्मान

सकारात्मक समाचार
वर्दी की शान, देश का सम्मान
वर्दी की शान, देश का सम्मान

भारतीय सैन्य इतिहास का स्वर्णिम दिन: वर्दी की शान, देश का सम्मान

सकारात्मक समाचार

आजादी के गुमनाम नायक: स्वतंत्रता संग्राम: केवल प्रसिद्ध नाम नहीं, अनगिनत बलिदानों की गाथा

सकारात्मक समाचार
स्वतंत्रता संग्राम: केवल प्रसिद्ध नाम नहीं, अनगिनत बलिदानों की गाथा
स्वतंत्रता संग्राम: केवल प्रसिद्ध नाम नहीं, अनगिनत बलिदानों की गाथा

आजादी के गुमनाम नायक: स्वतंत्रता संग्राम: केवल प्रसिद्ध नाम नहीं, अनगिनत बलिदानों की गाथा

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उम्मीद की किरण: जो निराशा में भी जगाती है आशा

सकारात्मक समाचार
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जो निराशा में भी जगाती है आशा

उम्मीद की किरण: जो निराशा में भी जगाती है आशा

सकारात्मक समाचार

विज्ञान और आस्था का अनोखा संगम: मंदिरों में छिपा वास्तुकला और ऊर्जा विज्ञान

सकारात्मक समाचार
मंदिरों में छिपा वास्तुकला और ऊर्जा विज्ञान
मंदिरों में छिपा वास्तुकला और ऊर्जा विज्ञान

विज्ञान और आस्था का अनोखा संगम: मंदिरों में छिपा वास्तुकला और ऊर्जा विज्ञान

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क्रिसमस क्यों मनाया जाता है? : ईसा मसीह का जन्म और क्रिसमस का धार्मिक महत्व

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ईसा मसीह का जन्म और क्रिसमस का धार्मिक महत्व
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क्रिसमस क्यों मनाया जाता है? : ईसा मसीह का जन्म और क्रिसमस का धार्मिक महत्व

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भारत के परमाणु पितामह होमी भाभा:: कैसे एक हाइपर-एक्टिव बालक बना भारत की परमाणु शक्ति का शिल्पकार

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कैसे एक हाइपर-एक्टिव बालक बना भारत की परमाणु शक्ति का शिल्पकार
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“वर्ण बनाम जाति": ' वैदिक समाज में जन्म नहीं, गुण–कर्म से तय होती थी सामाजिक पहचान'

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' वैदिक समाज में जन्म नहीं, गुण–कर्म से तय होती थी सामाजिक पहचान'
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वैदिक दृष्टिकोण से मनुस्मृति: वर्ण परिवर्तन, शिक्ष: जन्मना जाति नहीं, गुण–कर्म आधारित वर्ण व्यवस्था का दर्शन

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जन्मना जाति नहीं, गुण–कर्म आधारित वर्ण व्यवस्था का दर्शन
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