बेटियों ने अंतिम संस्कार से किया इनकार: वृद्धाश्रम और समाजसेवियों ने निभाया बेटे का फर्जहरियाणा के सोनीपत स्थित एक वृद्धाश्रम से सामने आई यह घटना रिश्तों, पारिवारिक जिम्मेदारी और सामाजिक संवेदनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। आश्रम में रह रहे 74 वर्षीय शिवचरण गुप्ता के निधन के बाद उनकी बेटियों ने दूरी और समय की कमी का हवाला देते हुए अंतिम संस्कार में शामिल होने से इनकार कर दिया। इस भावुक घटना ने वहां मौजूद सभी लोगों को झकझोर कर रख दिया और अंततः आश्रम प्रबंधन ने पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कराया। वीडियो कॉल से दी अंतिम विदाई शिवचरण गुप्ता के निधन की सूचना मिलने के बाद उनकी बेटियों से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने सोनीपत आने में असमर्थता जताई। उन्होंने Google Pay के माध्यम से ₹5100 भेजते हुए अनुरोध किया कि अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया वीडियो कॉल पर दिखाई जाए। परिवार की इस प्रतिक्रिया ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया। अंतिम संस्कार की सभी रस्में वीडियो कॉल के माध्यम से पूरी कराई गईं, जबकि परिजन दूर बैठे सब कुछ देखते रहे। अस्थियां लेने से भी किया इनकार घटना यहीं तक सीमित नहीं रही। अंतिम संस्कार के बाद जब आश्रम प्रबंधन ने बेटियों से अस्थियां लेने की बात कही तो उन्होंने आने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वे अस्थि विसर्जन के लिए भी नहीं पहुंच पाएंगी। इसके बाद आश्रम के कर्मचारियों और स्थानीय समाजसेवियों ने परिवार की भूमिका निभाते हुए अस्थियों का विधि-विधान से विसर्जन कराने का निर्णय लिया। इस पहल की स्थानीय लोगों ने सराहना की। आश्रम बना परिवार, पूरे सम्मान से निभाई जिम्मेदारी आश्रम प्रबंधन और स्थानीय समाजसेवियों ने शिवचरण गुप्ता को पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ अंतिम विदाई दी। उन्होंने बेटे का फर्ज निभाते हुए मुखाग्नि से लेकर सभी आवश्यक संस्कार पूरे किए। समाजसेवियों का कहना था कि कोई भी बुजुर्ग अकेला महसूस न करे और अंतिम समय में उसे सम्मान मिलना सबसे बड़ी मानवता है। इस संवेदनशील पहल ने मानवता की मिसाल पेश की।