शिवराज सिंह चौहान का कांग्रेस पर तीखा हमला: जनता को गुमराह करने का आरोप
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पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पार्टी के ‘MGNREGA बचाओ संग्राम’ अभियान पर तीखा हमला बोलते हुए सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कांग्रेस का यह आंदोलन मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि MGNREGA के नाम पर हुए कथित भ्रष्टाचार को छिपाने की एक सोची-समझी रणनीति है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस जनता को गुमराह करने के लिए भावनात्मक मुद्दों का सहारा ले रही है, जबकि हकीकत यह है कि रोजगार गारंटी योजना के नाम पर सबसे ज्यादा अनियमितताएं और घोटाले कांग्रेस शासित सरकारों के दौर में ही सामने आए हैं।
MGNREGA घोटालों की जिम्मेदारी कांग्रेस पर
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) का उद्देश्य गरीब और ग्रामीण मजदूरों को रोजगार देना था, लेकिन कांग्रेस शासन में यह योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। फर्जी जॉब कार्ड, अधूरे काम, मजदूरी भुगतान में गड़बड़ी और बिचौलियों की भूमिका जैसे कई मामले सामने आए, जिनकी जिम्मेदारी कांग्रेस सरकारों पर तय होती है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब जब इन घोटालों पर सवाल उठ रहे हैं, तो कांग्रेस ‘MGNREGA बचाओ संग्राम’ के नाम पर सड़क पर उतरकर खुद को निर्दोष साबित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे जनता की सहानुभूति हासिल करने का राजनीतिक हथकंडा बताया।
केंद्र सरकार पर आरोप, असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश
शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह बार-बार केंद्र सरकार पर निशाना साधकर असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने MGNREGA सहित सभी जनकल्याणकारी योजनाओं में पारदर्शिता, तकनीक और जवाबदेही को प्राथमिकता दी है।
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT), डिजिटल रिकॉर्ड और सोशल ऑडिट जैसे कदम उठाकर भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने का काम किया है, जबकि कांग्रेस के शासनकाल में व्यवस्था कमजोर रही और इसका फायदा भ्रष्ट तंत्र ने उठाया।
बयान के बाद गरमाई सियासत
शिवराज सिंह चौहान के इस तीखे बयान के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया है। कांग्रेस और भाजपा के बीच MGNREGA को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। एक ओर कांग्रेस इसे मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई बता रही है, तो वहीं भाजपा इसे पुराने घोटालों से ध्यान हटाने की कवायद करार दे रही है।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या ‘MGNREGA बचाओ संग्राम’ वास्तव में गरीब मजदूरों के हक की लड़ाई है, या फिर यह केवल राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का एक और अध्याय है? इसका फैसला आने वाले दिनों में जनता की राय और जांच एजेंसियों की कार्रवाई से होगा।



