बनारसी बोली में PM मोदी का दिल जीतता पल: 72वीं नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप का वर्चुअल उद्घाटन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि वे केवल प्रशासनिक निर्णय लेने वाले देश के प्रधानमंत्री नहीं हैं, बल्कि जनता की भावनाओं, संस्कृति और परंपराओं से गहराई से जुड़े हुए एक संवेदनशील जननायक हैं। वाराणसी में आयोजित 72वीं राष्ट्रीय वॉलीबॉल चैंपियनशिप के वर्चुअल उद्घाटन के दौरान उनका संबोधन राजनीतिक औपचारिकता से कहीं आगे बढ़कर भावनात्मक जुड़ाव का सशक्त उदाहरण बन गया।
इस अवसर पर पीएम मोदी ने जिस आत्मीयता और अपनत्व के साथ खिलाड़ियों और दर्शकों से संवाद किया, उसने पूरे माहौल को खास बना दिया। जैसे ही प्रधानमंत्री ने औपचारिक भाषण से हटकर बनारसी बोली में बात शुरू की, हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया।
“बनारस के जानय के चाहत हऊवै…” — तालियों से गूंज उठा समारोह स्थल
अपने सहज अंदाज़ में खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी अचानक बोले— “बनारस के जानय के चाहत हऊवै, त बनारस आवै के पड़ी…”
प्रधानमंत्री के ये शब्द सुनते ही कार्यक्रम स्थल तालियों और मुस्कुराहटों से गूंज उठा। यह केवल एक कहावत नहीं थी, बल्कि काशी की आत्मा, उसकी परंपरा और उसकी जीवनशैली का जीवंत प्रतिबिंब था। इस एक पंक्ति ने यह साबित कर दिया कि स्थानीय भाषा में कही गई बात सीधे दिल तक पहुंचती है।






