26 जनवरी 1950: ब्रिटिश प्रतीकों से आज़ाद होकर अशोक स्तंभ बना राष्ट्रीय चिन्ह

26 जनवरी 1950 की सुबह भारत के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हुई। यह दिन केवल संविधान लागू होने का नहीं था, बल्कि उस दिन भारत ने औपनिवेशिक पहचान को पूरी तरह त्याग कर एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्वयं को स्थापित किया।
औपनिवेशिक प्रतीकों का अंत, गणराज्य भारत की शुरुआत
उस सुबह सरकारी दफ्तरों, अदालतों और दस्तावेज़ों से ब्रिटिश राज की मुहर मिटा दी गई। सेना की वर्दियों से ‘रॉयल’ शब्द हटाया गया, ब्रिटिश क्राउन उतारा गया और नोटों से महारानी की तस्वीर इतिहास बन गई। ‘God Save the Queen’ की जगह राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को अपनाया गया। यूनियन जैक की जगह तिरंगा पूरे देश में शान से लहराने लगा।
सवाल से शुरू हुआ बदलाव
15 अगस्त 1947 को आज़ादी मिलने के बाद भी देश की पहचान में औपनिवेशिक प्रतीक बने हुए थे। संविधान सभा में सवाल उठा— क्या आज़ाद भारत रॉयल क्राउन और ब्रिटिश प्रतीकों के साथ आगे बढ़ेगा?
जवाब एकमत था—नहीं।
राष्ट्रीय प्रतीक को लेकर बहस
राष्ट्रीय प्रतीक के लिए कई सुझाव आए—
धार्मिक प्रतीक जैसे धर्मचक्र, गाय, ओम (ॐ),
आधुनिक प्रतीक जैसे फैक्ट्री, ग्लोब, बिजली, डैम, हाथ मिलाना।
लेकिन नेहरू, पटेल और डॉ. अंबेडकर ने स्पष्ट किया कि प्रतीक स्वदेशी, सभ्यतागत और धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए।









