भारत 15 अगस्त को आज़ाद: जानिए इस ऐतिहासिक तारीख का पूरा सच

भारत के इतिहास में 15 अगस्त 1947 और 26 जनवरी 1950—दोनों तारीखें बेहद अहम हैं। 15 अगस्त को देश को आज़ादी मिली, लेकिन भारत को उसकी असली पहचान 26 जनवरी को मिली, जब वह एक संपूर्ण लोकतांत्रिक गणतंत्र बना। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि जब भारत 1947 में आज़ाद हो गया था, तो फिर 26 जनवरी 1950 को ही गणतंत्र दिवस क्यों मनाया जाता है? आइए, इस सवाल का जवाब इतिहास के पन्नों से समझते हैं।
15 अगस्त 1947: आज़ादी मिली, लेकिन गणतंत्र नहीं बना भारत
15 अगस्त 1947 को भारत ने लगभग 200 साल की ब्रिटिश गुलामी से मुक्ति पाई। हालांकि, इस दिन भारत पूरी तरह स्वतंत्र गणतंत्र नहीं बना था। उस समय भारत का औपचारिक राष्ट्राध्यक्ष ब्रिटेन का राजा ही था और देश का शासन गवर्नर जनरल के माध्यम से चलाया जा रहा था।
भारत को वास्तविक संप्रभुता और आत्मनिर्णय का अधिकार तब मिला, जब देश को अपना खुद का संविधान प्राप्त हुआ। जब तक संविधान लागू नहीं हुआ, तब तक भारत एक स्वतंत्र लेकिन अधूरा लोकतंत्र था।
26 जनवरी 1930: ‘पूर्ण स्वराज’ का ऐतिहासिक संकल्प
26 जनवरी की तारीख भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में बेहद खास रही है। 26 जनवरी 1930 को लाहौर में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में ‘पूर्ण स्वराज’ की ऐतिहासिक घोषणा की गई थी। इस अधिवेशन की अध्यक्षता पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी। यहीं पहली बार कांग्रेस ने अंग्रेजों से डोमिनियन स्टेटस यानी अर्ध-स्वतंत्रता की मांग को खारिज कर दिया और साफ कहा— भारत अब अधूरी नहीं, पूरी आज़ादी चाहता है।









