वंदे भारत में परोसा गया ‘जिंदा कीड़ों वाला दही’: एक्सपायर्ड फूड पर बवाल

एक्सपायर्ड फूड पर बवाल

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देश की प्रीमियम ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह उसकी स्पीड या सुविधाएं नहीं, बल्कि खाने की गुणवत्ता को लेकर बड़ा विवाद है।
15 मार्च 2026 को पटना से टाटानगर जा रही वंदे भारत ट्रेन में यात्रियों को परोसे गए दही में जिंदा कीड़े मिलने का दावा किया गया। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि दही के कप के अंदर छोटे-छोटे कीड़े रेंग रहे हैं, जिससे यात्रियों में भारी नाराजगी फैल गई।

दही में कीड़े और एक्सपायर्ड फूड का दावा
यात्रियों का आरोप है कि: दही एक्सपायर्ड (समय सीमा समाप्त) था, पैकेजिंग पुरानी थी, खाने की ट्रे में भी कीड़े नजर आए, वीडियो में यात्री स्टाफ को एक्सपायरी डेट दिखाते हुए बहस करते नजर आते हैं। इससे फूड पॉइजनिंग जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का खतरा भी सामने आया।

‘कीड़े नहीं, केसर है’—स्टाफ के बयान से बढ़ा विवाद
सबसे चौंकाने वाली बात तब सामने आई जब ट्रेन स्टाफ ने इन कीड़ों को ‘केसर’ बताकर मामले को हल्का करने की कोशिश की। इस बयान के बाद यात्रियों का गुस्सा और बढ़ गया और उन्होंने लिखित शिकायत (Complaint Book) की मांग की।

वायरल वीडियो से मचा हड़कंप
यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद: रेलवे की फूड क्वालिटी पर सवाल उठे, लोगों ने जमकर आलोचना की, यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी |

सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा
वायरल वीडियो पर यूजर्स ने तीखी प्रतिक्रिया दी:
“दही में कीड़े और स्टाफ कह रहा है केसर!”
“अब सफेद केसर की खोज हो गई है”
“रेलवे का खाना खाने से अच्छा भूखे रहना”
“एक्सपायर्ड फूड पर नया स्टिकर लगाकर बेचा जा रहा है”

रेल मंत्रालय का बड़ा एक्शन
मामले के बढ़ने के बाद रेल मंत्रालय ने सख्त कदम उठाए: IRCTC पर ₹10 लाख का जुर्माना, सर्विस प्रोवाइडर पर ₹50 लाख का जुर्माना, संबंधित कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट हमेशा के लिए रद्द, यह कार्रवाई रेलवे की छवि बचाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए की गई है।

वंदे भारत की छवि पर सवाल
तेज रफ्तार और आधुनिक सुविधाओं के लिए जानी जाने वाली वंदे भारत ट्रेन अब खाने की गुणवत्ता को लेकर सवालों के घेरे में है। यह घटना दर्शाती है कि प्रीमियम सेवाओं के बावजूद बेसिक सुविधाओं में लापरवाही यात्रियों के भरोसे को तोड़ सकती है।

यह मामला सिर्फ एक ट्रेन तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे रेलवे सिस्टम में फूड सेफ्टी और क्वालिटी कंट्रोल पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। सरकार और रेलवे को यह सुनिश्चित करना होगा कि यात्रियों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन मिले, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

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