7 रोचक बातें अंतरिक्ष यात्रा से जुड़ी: नींद, शरीर में बदलाव और स्पेस स्टेशन की दिनचर्या पर रोचक खुलासे

अंतरिक्षयात्रा के दौरान और उसके बाद अंतरिक्षयात्रियों को कई प्रकार के अनुभव होते हैं. ऐसे ही 7 अनुभवों के बारे में जानकारी.
अंतरिक्ष यात्रियों की शयन क्रिया: अंतरिक्षयात्रियों के लिए अंतरिक्ष में नींद लेना काफी कठीन हो जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि पृथ्वी की नजदीकी भ्रमण कक्षा में सूर्यास्त और सूर्योदय हर 90 मिनट में एक बार हो जाता है. इससे दिन और रात का समय ठीक ढंग से समझ पाना कठीन हो जाता है.
अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन में ग्रीनविच मीन टाइम को आधार माना जाता है और अंतरिक्षयात्री उसी समय के हिसाब से खुद को ढालते हैं. यह कठीन है परंतु उनको इसका अभ्यास कराया जाता है.
अंतरिक्षयात्रियों की लम्बाई बढ जाती है: चुँकि अंतरिक्ष में गुरूत्वाकर्षण बल का प्रभाव नहीं होता इसलिए अंतरिक्षयात्रियों की रीढ की हड्डी का कॉलम फैलता है और उनकी लम्बाई 5 से 8 सेमी तक बढ जाती है. पृथ्वी पर लौटने के बाद उन्हें पीठ दर्द की शिकायत होने की सम्भावना रहती है.
खर्राटों मे कमी: एक अभ्यास से पता चला है कि अंतरिक्षयात्री जब अंतरिक्ष में नींद लेते हैं तो अपेक्षाकृत कम खर्राटे लेते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि खर्राटों के लिए गुरूत्वाकर्षणबल कुछ हद तक जिम्मेदार है और अंतरिक्ष में उसकी अनुपलब्धता खर्राटों मे कमी ला देती है.









