भारत के परमाणु पितामह होमी भाभा:: कैसे एक हाइपर-एक्टिव बालक बना भारत की परमाणु शक्ति का शिल्पकार

यह बात उसने कही थी जिसने भारत को परमाणु शक्ति सम्पन्न बनाया. इसकी पहल भी इन्होनें ही की थी, वह भी तब जब कोई इस बारे में सोचता भी नहीं था. होमी जहाँगीर भाभा सही मायनों में देश के परमाणु “पितामह” थे.
“यह तो सोता ही नहीं है!” – मेहरबाई भाभा को यह चिंता इतनी सताने लगी कि उन्होनें अपने पति जहाँगीर भाभा से कहा कि नन्हे होमी को डॉक्टर को दिखाना होगा. डॉक्टर ने जाँच की और मेहरबाई को सांत्वना देते हुए कहा कि चिंता ना करे. यह बच्चा हाइपर एक्टिव है. कम सोता है लेकिन खूब सोचता है.
वह बच्चा होमी जहाँगीर भाभा था जिसका जन्म 30 अक्टूबर 1909 को मुम्बई [तब बम्बई] में एक सुसंस्कृत पारसी परिवार में हुआ था.
होमी बचपन से काफी मेधावी थे. उन्होने प्रारम्भिक शिक्षा सेंट मेरी स्कूल से प्राप्त की और 15 वर्ष की उम्र में तो सीनियर कैम्ब्रीज परिक्षा भी पास कर ली. यह 1924 की बात है. इसके 3 साल बाद होमी इंग्लैंड गए और कैम्ब्रीज में न्यूक्लियर फिजिक्स की पढाई करने लगे. पढाई पूरी करने के बाद अगले 12 साल तक होमी वहीं रहे और कोस्मिक रे के ऊपर शोध कर पीएचडी भी प्राप्त की. उन्हें जब पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई तब उनकी उम्र मात्र 25 वर्ष थी.
1940 में होमी भाभा भारत आए. इस बीच द्वितीय विश्वयुद्ध छीड़ जाने से वापस ब्रिटेन जाना मुश्किल हो गया था इसलिए उन्होने बंगलूर स्थित इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस में पढाना शुरू कर दिया. वहीं उनकी मुलाकात सीवी रमन और विक्रम साराभाई से भी हुई.
19 दिसम्बर 1945 को होमी जहाँगीर भाभा के सुझाव पर सर दोराब टाटा [टाटा ट्रस्ट के प्रमुख] ने टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च की स्थापना की. होमी भाभा को इस संस्थान के पहले निदेशक बने.
होमी जहाँगीर भाभा शुरू से मानते थे कि परमाणु ऊर्जा से देश को काफी फायदा पहुँच सकता है और बिजली की सारी समस्या समाप्त हो सकती है. उन्होने दोराब टाटा से कहा भी था कि हम ऐसा संस्थान बनाते हैं जहाँ से परमाणु वैज्ञानिक तैयार किए जा सकें. आज से दशकों बाद भारत में परमाणु बिजली संयत्र लगाए जाएंगे तब देश को बाहर से लोग नहीं लाने पड़ॆंगे. देश में ही काफी वैज्ञानिक तैयार होंगे.
तब होमी भाभा पर कम ही लोग यकीन करते थे, लेकिन वे हमेशा दूर की सोचते थे. और आज यह सच है.
आज़ादी के बाद इनके कहने पर ही प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने संसद में विधेयक पारित कर इंडियन एटोमिक एनर्जी कमीशन बनाया. इसके बाद अगस्त 1954 में डिपार्टमेंट ऑफ एटोमिक एनर्जी बना और होमी भाभा इसके सचीव बने. यह विभाग सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करता है. तब तक भारत ने ट्रोम्बे में पहले परमाणु सयंत्र पर काम शुरू कर दिया था.
लेकिन होमी जहाँगीर भाभा परमाणु ऊर्जा से भी आगे बढने को तत्पर थे. उन्होने देश के लिए परमाणु हथियार बनाने की बात सोच रखी थी. राज चेंगप्पा की किताब “वीपन ऑफ पीस” के अनुसार भाभा ने इस बारे में राजा रमन्ना से बात भी की थी. भारत के पहले परमाणु परीक्षण के पीछे जिन लोगों का हाथ है उन्हें भर्ती करने और ट्रेनिंग देने में होमी जहाँगीर भाभा का बड़ा योगदान है.









