भारतीय सैन्य इतिहास का स्वर्णिम दिन: वर्दी की शान, देश का सम्मान

वर्दी की शान, देश का सम्मान

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वर्दी की शान, देश का सम्मान।
हर वर्ष 15 जनवरी को मनाया जाने वाला भारतीय थल सेना दिवस न केवल एक उत्सव है, बल्कि यह भारत की सैन्य संप्रभुता, शौर्य, अनुशासन और बलिदान का प्रतीक है। वर्ष 2026 में भारत अपना 78वां सेना दिवस मना रहा है, जो हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है।

15 जनवरी का ऐतिहासिक महत्व
दरअसल, 15 जनवरी 1949 को लेफ्टिनेंट जनरल के. एम. करिअप्पा ने भारत के पहले भारतीय सेनाध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला था। इस दिन ब्रिटिश जनरल फ्रांसिस रॉय बुचर ने उन्हें औपचारिक रूप से भारतीय थल सेना की कमान सौंपी। यह क्षण औपनिवेशिक विरासत से मुक्ति और आत्मनिर्भर भारत की सैन्य नींव का प्रतीक बना। बाद में, वर्ष 1986 में करिअप्पा को फील्ड मार्शल की मानद उपाधि दी गई।

सेना दिवस की परंपरा
स्वतंत्रता के बाद पहले सेना दिवस को 1 अप्रैल को मनाने का प्रस्ताव था, लेकिन ऐतिहासिक कारणों से 15 जनवरी को स्थायी तिथि के रूप में चुना गया। शुरुआती दौर में कार्यक्रम सीमित थे, किंतु समय के साथ भव्य परेड और राष्ट्रीय समारोहों की परंपरा विकसित हुई।

सेना दिवस 2026: जयपुर में ऐतिहासिक परेड
इस वर्ष 78वां सेना दिवस समारोह जयपुर (राजस्थान) में आयोजित किया जा रहा है। अब यह परंपरा बन चुकी है कि परेड दिल्ली से बाहर विभिन्न शहरों में हो, ताकि सेना और जनता के बीच जुड़ाव और मजबूत हो। परेड में आधुनिक हथियार, टैंक, मिसाइल, राडार सिस्टम, युद्ध कौशल और एनिमल कंटीजेंट—जैसे जांस्कर घोड़े, ऊँट और खोजी कुत्ते—विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।

दुनिया की सबसे बड़ी स्वैच्छिक सेना
भारतीय थल सेना विश्व की सबसे बड़ी स्वैच्छिक सेना मानी जाती है। इसमें लगभग 14.5 लाख सक्रिय सैनिक, 11–12 लाख रिज़र्व बल और करीब 25 लाख अर्धसैनिक बल देश की सुरक्षा में तैनात हैं।
लोवी इंस्टीट्यूट (नवंबर 2025) के एशिया पावर इंडेक्स के अनुसार, भारत अमेरिका और चीन के बाद तीसरी सबसे बड़ी सैन्य शक्ति है, जबकि ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स भारत को दुनिया की चौथी सबसे शक्तिशाली सेना मानता है।

सियाचिन से रेगिस्तान तक—अदम्य साहस
भारतीय सेना सियाचिन ग्लेशियर जैसे दुनिया के सबसे ऊँचे और कठिन युद्धक्षेत्र की रक्षा करती है, जहाँ तापमान शून्य से बेहद नीचे रहता है। इसके साथ ही रेगिस्तान, घने जंगल और पर्वतीय सीमाओं पर भी सेना हर परिस्थिति में मुस्तैद रहती है।

वैश्विक भूमिका और यूएन मिशन
भारतीय थल सेना ने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में विश्व में सबसे अधिक सैनिक भेजने वाले देशों में अग्रणी भूमिका निभाई है। इसकी रणनीतिक क्षमता, अनुशासन और युद्ध अनुभव को वैश्विक स्तर पर सम्मान प्राप्त है।

‘सेवा परमो धर्मः’—सेना का मूल मंत्र
भारतीय थल सेना का आदर्श वाक्य ‘सेवा परमो धर्मः’ है, जिसका अर्थ है—सेवा ही सर्वोच्च धर्म है। यही भावना सेना के हर जवान को ‘सर्विस बिफोर सेल्फ’ के सिद्धांत पर कार्य करने की प्रेरणा देती है।

आधुनिक सेना और महिलाओं की भागीदारी
हाल के वर्षों में सेना दिवस समारोहों में महिला अधिकारियों की बढ़ती भूमिका और नेतृत्व को विशेष रूप से रेखांकित किया जा रहा है, जो भारतीय सेना के आधुनिक और समावेशी स्वरूप को दर्शाता है।

2026 का फोकस
वर्ष 2026 के लिए भारतीय थल सेना का मुख्य फोकस ‘नेटवर्किंग और डेटा-केंद्रितता’ पर है, जो आधुनिक तकनीक, डिजिटल एकीकरण और भविष्य के युद्ध स्वरूप को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

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