आजादी के गुमनाम नायक: स्वतंत्रता संग्राम: केवल प्रसिद्ध नाम नहीं, अनगिनत बलिदानों की गाथा

भारत का स्वतंत्रता संग्राम केवल कुछ प्रसिद्ध नामों तक सीमित नहीं था। यह संघर्ष करोड़ों भारतीयों के त्याग, साहस और संकल्प से रचा गया एक विशाल आंदोलन था। इतिहास के पन्नों में गांधी, भगत सिंह और रानी लक्ष्मीबाई जैसे नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हैं, लेकिन इनके पीछे खड़े उन असंख्य गुमनाम नायकों और नायिकाओं का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जिनके बिना आज़ादी की यह कहानी अधूरी रहती।
हैदराबाद स्थित प्रेमिया अकादमी जैसे शिक्षण संस्थान इसी विचार को आगे बढ़ाते हैं कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को अपने इतिहास, संस्कृति और विरासत से गहराई से जोड़ने का माध्यम भी बननी चाहिए।
जंगलों से उठी आज़ादी की चिंगारी
स्वतंत्रता संग्राम केवल शहरों और सभाओं तक सीमित नहीं था। आंध्र प्रदेश के घने जंगलों में अल्लूरी सीताराम राजू ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध छेड़ दिया। उन्होंने आदिवासी समुदायों को संगठित कर अंग्रेजों की सैन्य चौकियों पर हमले किए और शोषणकारी नीतियों का डटकर विरोध किया।
इसी तरह, मणिपुर की रानी गाइदिनल्यू ने महज किशोरावस्था में ही ब्रिटिश साम्राज्यवाद को चुनौती दी। कम उम्र में नेतृत्व संभालकर उन्होंने नागा समुदाय को एकजुट किया और औपनिवेशिक सत्ता के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया।









