भविष्य की जंग के लिए तैयार भारत: ड्रोन तकनीक और हाइब्रिड वॉरफेयर से लैस नई ताकत

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भारतीय सेना बदलते युद्ध परिदृश्य के अनुरूप खुद को लगातार आधुनिक बना रही है। इसी दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए सेना रेगिस्तानी इलाकों के लिए एक नई और अत्याधुनिक युद्ध इकाई ‘भैरव बटालियन’ तैयार कर रही है। यह बटालियन ड्रोन तकनीक, एडवांस्ड सेंसर, रोबोटिक सिस्टम और रेगिस्तान-अनुकूल युद्ध कौशल से लैस होगी।

राजस्थान के नसीराबाद (अजमेर) में तैनात ‘भैरव बटालियन’ को हाइब्रिड वॉरफेयर और आधुनिक युद्ध तकनीकों की कड़ी ट्रेनिंग दी गई है। यह यूनिट आगामी 15 जनवरी को जयपुर में आयोजित सेना दिवस (Army Day) परेड में पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी शक्ति का प्रदर्शन करेगी।

ड्रोन वॉरफेयर में माहिर ‘भैरव’
भैरव बटालियन की सबसे बड़ी ताकत इसके ड्रोन-प्रशिक्षित कमांडो हैं। सेना ने एक लाख से अधिक सैनिकों को ड्रोन संचालन की ट्रेनिंग दी है। ये जवान दुश्मन के इलाके में गहराई तक जाकर निगरानी, लक्ष्य पहचान, रियल-टाइम इंटेलिजेंस और सटीक हमले करने में सक्षम हैं।

पैरा SF और इन्फैंट्री के बीच की कड़ी
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ‘भैरव बटालियन’ पैरा स्पेशल फोर्स और नियमित इन्फैंट्री बटालियन के बीच की रणनीतिक कमी को पूरा करती है। प्रत्येक बटालियन में लगभग 250 चुस्त और अत्यंत घातक कमांडो होते हैं, जिन्हें Lean, Lethal और Highly Mobile यूनिट के रूप में विकसित किया गया है।

अब तक ऐसी 15 बटालियन चीन और पाकिस्तान सीमा पर तैनात की जा चुकी हैं, जबकि भविष्य में 25 भैरव बटालियन बनाने की योजना है।

‘अखंड प्रहार’ अभ्यास में दिखा दम
हाल ही में राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्र में हुए ‘अखंड प्रहार’ युद्धाभ्यास में भैरव कमांडो ने आधुनिक तकनीक और नई रणनीति से अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन किया। इस अभ्यास को दक्षिणी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने स्वयं देखा और जवानों की सराहना की।

नाम और उद्देश्य
‘भैरव’ शब्द का अर्थ है रक्षक और साहसी। यह फोर्स उच्च जोखिम वाले अभियानों और दुश्मन के इलाके में गहरे हमलों (Deep Strike) के लिए बनाई गई है। इसके गठन में यूक्रेन और मध्य-पूर्व जैसे आधुनिक युद्धों से मिली सीख को शामिल किया गया है।

आज युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि ड्रोन, साइबर, इलेक्ट्रॉनिक और सूचना युद्ध का रूप ले चुका है। ‘भैरव बटालियन’ भारतीय सेना की उसी दूरदर्शी सोच का प्रतीक है, जो देश की सुरक्षा, संप्रभुता और आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति को और मजबूत बनाती है।

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