विश्व असमानता रिपोर्ट 2026: दुनिया की 75% संपत्ति टॉप 10% लोगों के पास, वैश्विक गैरबराबरी नई चरम सीमा पर

दुनिया की 75% संपत्ति टॉप 10% लोगों के पास, वैश्विक गैरबराबरी नई चरम सीमा पर

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नई दिल्ली/पेरिस:
नवीनतम विश्व असमानता रिपोर्ट 2026 के अनुसार, दुनिया में आर्थिक और सामाजिक गैरबराबरी अभूतपूर्व स्तर पर पहुँच चुकी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया की शीर्ष 10% आबादी के पास कुल वैश्विक संपत्ति का 75% हिस्सा है, जबकि निम्न 50% आबादी के पास मात्र 5–6% संपत्ति बचती है। ये आंकड़े इस बात को स्पष्ट करते हैं कि आर्थिक विकास भले ही तेज़ हुआ हो, लेकिन उसका लाभ समान रूप से वितरित नहीं हुआ।

वैश्विक स्तर पर असमानता का विस्तार
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में धनी और गरीब वर्गों के बीच अंतर तेजी से बढ़ा है। आर्थिक महामारी, युद्ध, ऊर्जा संकट और तेजी से बदलती तकनीकी अर्थव्यवस्था ने असमानता को और गहरा किया है।

अमीर देशों में पूँजीकरण, गरीब देशों में संघर्ष
विकसित देशों में कॉर्पोरेट वेल्थ, टेक कंपनियों और फाइनेंस सेक्टर की मजबूत पकड़ ने सबसे ऊपर के वर्ग की संपत्ति में जबरदस्त बढ़ोतरी की। वहीं विकासशील देशों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अवसरों की कमी ने निचले वर्ग को और कमजोर किया।
 

एशिया और अफ्रीका सबसे अधिक प्रभावित: रिपोर्ट के अनुसार—
अफ्रीका में आय और संपत्ति असमानता 30 साल के उच्चतम स्तर पर है।
दक्षिण एशिया, खासकर भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में आर्थिक खाई लगातार चौड़ी हो रही है।
यूरोप दुनिया का सबसे संतुलित क्षेत्र बना हुआ है, हालांकि पिछले 5 वर्षों में यहाँ भी असमानता में हल्की वृद्धि देखी गई।

भारत की स्थिति: शीर्ष 10% की पकड़ मजबूत
भारत में असमानता तेजी से बढ़ती दिखाई देती है—
टॉप 10% भारतीयों के पास राष्ट्रीय संपत्ति का 75% हिस्सा है।
निचले 50% को कुल संपत्ति में केवल 5–6% का हिस्सा मिलता है।
रिपोर्ट कहती है कि भारत में तकनीकी और सेवा क्षेत्र की तेज़ प्रगति के बावजूद, ग्रामीण-शहरी खाई और शिक्षा-अवसर असमानता बड़ी चुनौती बनी हुई है।

दुनिया में क्या बढ़ा रही है असमानता?
रिपोर्ट कई प्रमुख कारण बताती है— पूँजी पर उच्च वर्ग की पकड़, संपत्ति में जेनरेटिव टेक्नोलॉजी और ऑटोमेशन का प्रभाव, टैक्स चोरी और टैक्स संरचना की खामियाँ, सामाजिक सुरक्षा का कमजोर ढांचा, धनी देशों में कॉर्पोरेट एकाधिकार |

रिपोर्ट की चेतावनी और सुझाव
रिपोर्ट आगाह करती है कि यदि तुरंत वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर कदम नहीं उठाए गए, तो 2030 तक असमानता "विस्फोटक स्तर" पर पहुँच सकती है।
सुझाव में शामिल हैं—
ग्लोबल वेल्थ टैक्स
धनी वर्ग पर प्रोग्रेसिव टैक्स
शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सार्वभौमिक निवेश
डिजिटल डिवाइड कम करने के लिए वैश्विक योजनाएँ
सामाजिक सुरक्षा नेटवर्क को मजबूत करना

रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि आर्थिक वृद्धि तभी सार्थक है, जब विकास का लाभ समान रूप से सभी तबकों तक पहुँचे।

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