Weather Alert 2026: अल नीनो की वापसी से भारत पर मंडरा रहा खतरा

अल नीनो की वापसी से भारत पर मंडरा रहा खतरा
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Harsh Pandya

Harsh Pandya

0 सेकंड पहले

Kya koi aur khabar bhi aane wali hai is topic par?

Simran Arora

Simran Arora

0 सेकंड पहले

Itni badi khabar! Bahut shocking hai yeh.

Shruti Bajpai

Shruti Bajpai

0 सेकंड पहले

Nishpaksh patrakarita ke liye dhanyawad.

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विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने दुनिया भर के देशों को सतर्क करते हुए कहा है कि मई से जुलाई 2026 के बीच अल नीनो (El Nino) की स्थिति दोबारा विकसित हो सकती है। यह जलवायु परिवर्तनकारी घटना भारत सहित पूरे दक्षिण एशिया के मौसम को प्रभावित कर सकती है। अल नीनो आमतौर पर हर 2 से 7 साल में आता है और 9 से 12 महीनों तक सक्रिय रहता है। इसके प्रभाव से समुद्र की सतह का तापमान बढ़ता है, जिससे बारिश, हवाओं और तापमान के पैटर्न में बड़ा बदलाव देखने को मिलता है।

भारत में बढ़ेगी गर्मी, कमजोर पड़ सकता है मानसून
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) पहले ही इस साल सामान्य से कम बारिश का अनुमान दे चुका है। अगर अल नीनो सक्रिय होता है तो देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर पड़ सकता है। इसका सीधा असर खेती, जल भंडारण और बिजली उत्पादन पर पड़ेगा। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार जून से सितंबर के बीच बारिश सामान्य से 8 प्रतिशत तक कम हो सकती है, जिससे कई राज्यों में सूखे जैसे हालात बन सकते हैं।

दिल्ली, यूपी, राजस्थान और मध्य भारत में लू का कहर
देश के कई हिस्सों में अप्रैल महीने से ही गर्मी ने विकराल रूप ले लिया है। दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मध्य भारत के इलाकों में तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। प्रयागराज 45.2 डिग्री सेल्सियस के साथ उत्तर प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा। सुबह 10 बजे के बाद ही लू के थपेड़े लोगों को घरों में रहने पर मजबूर कर रहे हैं। मौसम विभाग ने अगले 3 से 4 दिनों तक यही स्थिति बने रहने का अलर्ट जारी किया है।

पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर में बारिश और तूफान का अलर्ट
जहां उत्तर और पश्चिम भारत गर्मी से झुलस रहा है, वहीं बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में मौसम बदलने वाला है। IMD ने 26 से 28 अप्रैल के बीच तेज हवाएं, गरज-चमक और बारिश की संभावना जताई है। असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

हिमालय की बर्फ पिघलना बना नई चिंता
ICIMOD की स्नो अपडेट 2026 रिपोर्ट ने नई चिंता पैदा कर दी है। हिंदूकुश हिमालयी क्षेत्र में बर्फ का स्तर औसत से 27.8% कम दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, गंगा, सिंधु और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों के जलस्तर पर इसका असर पड़ सकता है, जिससे आने वाले वर्षों में जल संकट और गहरा सकता है।

किसानों और आम जनता के लिए खतरे की घंटी
भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए अल नीनो की वापसी किसी खतरे से कम नहीं है। कमजोर मानसून से फसल उत्पादन घट सकता है, खाद्यान्न कीमतें बढ़ सकती हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। वहीं भीषण गर्मी से स्वास्थ्य संकट, बिजली संकट और जल संकट भी गहरा सकता है।

2026 का मौसम भारत के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। एक तरफ लू और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, दूसरी तरफ कमजोर मानसून और जल संकट का खतरा। ऐसे में सरकार, किसानों और आम जनता को अभी से सतर्क रहने की जरूरत है।

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Harsh Pandya

Harsh Pandya

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Kya koi aur khabar bhi aane wali hai is topic par?

Simran Arora

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Itni badi khabar! Bahut shocking hai yeh.

Shruti Bajpai

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Nishpaksh patrakarita ke liye dhanyawad.

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