महात्मा गांधी की दांडी मार्च की गूंज: अहिंसा और शांति का संदेश लेकर निकले रिटायर्ड फौजी

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महात्मा गांधी की ऐतिहासिक दांडी मार्च की स्मृतियों को जीवंत रखने के लिए देश के 15 रिटायर्ड सीनियर आर्मी अधिकारी और एक पूर्व आईपीएस अधिकारी एक विशेष पदयात्रा पर निकल रहे हैं। यह यात्रा केवल इतिहास को याद करने का प्रयास नहीं, बल्कि अहिंसा, शांति और नैतिक साहस के मूल्यों को आज के समय में फिर से आत्मसात करने की प्रेरक पहल है।
‘इकोज ऑफ दांडी’: इतिहास को पैरों से महसूस करने की यात्रा
इस पदयात्रा को ‘इकोज ऑफ दांडी: रिट्रेसिंग द हिस्टोरिक पाथ ऑन फुट’ नाम दिया गया है। यह यात्रा 3 जनवरी से 17 जनवरी तक चलेगी, जिसमें सभी प्रतिभागी साबरमती आश्रम से दांडी तक करीब 405 किलोमीटर पैदल चलेंगे। यह वही मार्ग है, जिससे होकर महात्मा गांधी ने 1930 के नमक सत्याग्रह के दौरान ऐतिहासिक दांडी मार्च किया था।
62 वर्ष की उम्र में शांति और संयम का संदेश
इस यात्रा की सबसे खास बात यह है कि इसमें शामिल सभी अधिकारी 62 वर्ष से अधिक उम्र के हैं और उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा देश की सुरक्षा में समर्पित किया है। अब ये अधिकारी हथियारों के बजाय अपने कदमों से समाज को शांति और संयम का संदेश दे रहे हैं।
अहिंसा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा
रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल अनिल पुरी ने बताया कि यह विचार करीब डेढ़ साल पहले आया था। उन्होंने कहा कि सेना में रहते हुए हिंसा कभी-कभी कर्तव्य बन जाती है, लेकिन अब समय है गांधीजी के बताए अहिंसा के मार्ग को अपनाने का। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि महात्मा गांधी ने भी 60 वर्ष की उम्र में दांडी मार्च की शुरुआत की थी, जिससे उन्हें यह प्रेरणा मिली।
राजनीतिक उद्देश्य से दूर, आत्मचिंतन की यात्रा
जनरल पुरी ने स्पष्ट किया कि यह पदयात्रा किसी भी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं की जा रही है। इसका मकसद गांधीजी की भावनाओं को समझना, आत्मचिंतन करना और आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देना है कि देशभक्ति, फिटनेस और प्रतिबद्धता की कोई उम्र नहीं होती।
युवाओं और एनसीसी कैडेट्स से होगा संवाद
यात्रा के दौरान प्रतिभागी रास्ते में पड़ने वाले गांवों और कस्बों में रुकेंगे, जहां वे स्कूल-कॉलेज के छात्रों, एनसीसी कैडेट्स, ग्रामीणों, सरपंचों और पूर्व सैनिकों से संवाद करेंगे। नडियाद का संतराम मंदिर सहित वे सभी स्थान इस यात्रा में शामिल हैं, जहां गांधीजी अपने 24 दिवसीय दांडी मार्च के दौरान ठहरे थे।
स्वास्थ्य और सुरक्षा की पूरी तैयारी
यात्रा के लिए स्वास्थ्य और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। प्रतिभागियों ने महीनों तक शारीरिक तैयारी की है और अपने साथ फर्स्ट एड किट रखी जाएगी। जरूरत पड़ने पर स्थानीय सरकारी चिकित्सा सुविधाओं की मदद भी ली जाएगी।
नैतिक साहस और अनुशासन की पुनः गूंज
यह पदयात्रा दांडी मार्च के उस मूल भाव को फिर से जगाने का प्रयास है, जो नैतिक साहस, अनुशासन और उद्देश्य की स्पष्टता का प्रतीक रहा है।




