इंसान फिर लौट रहा चांद की ओर: NASA का Artemis II मिशन
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करीब 50 साल के लंबे इंतजार के बाद इंसान एक बार फिर चांद के बेहद करीब पहुंचने जा रहा है। NASA का महत्वाकांक्षी Artemis II मिशन इस ऐतिहासिक यात्रा को साकार करने की दिशा में सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। इस मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्रियों को चांद के पास लूनर ऑर्बिट (Lunar Orbit) तक भेजा जाएगा, जिससे भविष्य में चांद पर दोबारा इंसानी कदम रखने का रास्ता तैयार होगा।
Artemis II: इतिहास रचने वाला मिशन
Artemis II सिर्फ एक अंतरिक्ष मिशन नहीं, बल्कि मानवता के लिए अंतरिक्ष विज्ञान में नई शुरुआत है। पिछले 53 वर्षों में इंसान ने जितनी भी अंतरिक्ष यात्राएं की हैं, वे पृथ्वी के आसपास तक ही सीमित रही हैं। लेकिन अब यह मिशन अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र तक पहुंचाएगा, जो अंतरिक्ष अन्वेषण के एक नए युग की शुरुआत करेगा।
50 साल पुराने रिकॉर्ड की चुनौती
इस मिशन के चार अंतरिक्ष यात्री लगभग 4,06,773 किलोमीटर दूर तक यात्रा करेंगे। यह दूरी 1970 के Apollo 13 mission द्वारा बनाए गए रिकॉर्ड (4,00,171 किलोमीटर) से करीब 2,500 किलोमीटर अधिक है। इस तरह Artemis II अंतरिक्ष में इंसानों द्वारा तय की गई सबसे लंबी दूरी का नया इतिहास रच सकता है।
लूनर फ्लाईबाय और गहरे अंतरिक्ष का अनुभव
भारतीय समयानुसार 7 अप्रैल 2026 रात 12:15 बजे, अंतरिक्ष यात्री चांद के बेहद करीब से गुजरते हुए अपना लूनर फ्लाईबाय शुरू करेंगे। इस दौरान वे चांद के उस हिस्से का भी चक्कर लगाएंगे, जो पृथ्वी से कभी दिखाई नहीं देता। यह मिशन अपोलो युग के बाद पहली बार इंसानों को डीप स्पेस (Deep Space) में ले जाएगा।
फ्री-रिटर्न ट्रैजेक्टरी: सुरक्षा का मास्टरस्ट्रोक
Artemis II मिशन की सबसे बड़ी खासियत इसकी फ्री-रिटर्न ट्रैजेक्टरी है। इस तकनीक के तहत यदि स्पेसक्राफ्ट का इंजन फेल हो जाए, तब भी चांद का गुरुत्वाकर्षण उसे स्वतः पृथ्वी की ओर वापस धकेल देगा। यह सिस्टम अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिए बेहद अहम और भरोसेमंद माना जा रहा है।
डीप स्पेस रेडिएशन का बड़ा परीक्षण
पृथ्वी से लगभग 2,000 किलोमीटर ऊपर जाने के बाद उसका चुंबकीय सुरक्षा कवच खत्म हो जाता है। ऐसे में अंतरिक्ष यात्रियों को खतरनाक कॉस्मिक रेडिएशन का सामना करना पड़ेगा। Artemis II मिशन का एक अहम उद्देश्य इसी चुनौतीपूर्ण वातावरण में इंसानी शरीर और तकनीक के प्रदर्शन का अध्ययन करना है।
वापसी में बनेगा रफ्तार का नया रिकॉर्ड
मिशन के अंत में Orion spacecraft धरती के वायुमंडल में लगभग 40,200 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से प्रवेश करेगा। इस दौरान इसकी हीट शील्ड को करीब 2,760°C तापमान सहना होगा, जो सूरज की सतह के तापमान का लगभग आधा है। यह वापसी अंतरिक्ष इतिहास में सबसे तेज और चुनौतीपूर्ण एंट्री में से एक होगी।








