“शाम ढलते ही ‘VIP’ दस्तक!”: NEET छात्रा की संदिग्ध मौत से उठा बड़ा सवाल
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं
पहले आप अपनी बात रखें
बिहार की राजधानी पटना से सामने आया एक सनसनीखेज मामला पूरे राज्य में चर्चा और आक्रोश का विषय बन गया है। कंकड़बाग स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही 18 वर्षीय छात्रा की संदिग्ध मौत ने न केवल छात्राओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि इस हॉस्टल पर लगे VIP और राजनीतिक हस्तियों की आवाजाही के आरोपों ने मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों और स्थानीय लोगों के आरोपों के अनुसार, शाम ढलते ही इस हॉस्टल में कथित तौर पर प्रभावशाली नेताओं और रसूखदार लोगों का आना-जाना होता था। आरोप है कि हॉस्टल के मालिक मनीष कुमार रंजन के राजनीतिक संबंधों के कारण यहां नियम-कानूनों की खुलेआम अनदेखी की जाती थी।
संदिग्ध मौत ने खोले कई सवाल
यह मामला 6 जनवरी 2026 का है, जब जहानाबाद की रहने वाली एक छात्रा अपने कमरे में बेहोश हालत में मिली। छात्रा को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई। इस मामले में 9 जनवरी 2026 को चित्रगुप्त नगर थाना में एफआईआर दर्ज की गई। शुरुआत में इसे सामान्य घटना माना गया, लेकिन बाद में आई एम्स और पीएमसीएच की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया।
रिपोर्ट में यौन हिंसा के संकेत और शरीर पर 10 से अधिक जख्म मिलने की बात सामने आई, जिसके बाद मामला गंभीर हो गया।
हॉस्टल मालिक की जमानत याचिका पर अदालत में तीखी बहस
मामले में आरोपी शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष कुमार रंजन की नियमित जमानत याचिका पर पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश राजीव रंजन रमण की अदालत में सुनवाई हुई।
अदालत में: CBI और बिहार पुलिस की ओर से शपथयुक्त आवेदन दाखिल किया गया, आरोपी के वकील ने दावा किया कि उनके मुवक्किल निर्दोष हैं, केस डायरी में उनका नाम नहीं है और किसी गवाह ने आरोप नहीं लगाया,
हालांकि, पीड़िता के परिवार की ओर से दायर विरोध याचिका में उन्हें इस मामले का मुख्य मास्टरमाइंड बताया गया। इस दौरान CBI और सूचक के वकीलों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई, जिसके कारण न्यायाधीश कुछ समय के लिए अदालत छोड़कर अपने चैंबर में चले गए। अदालत ने मामले में 11 मार्च तक आदेश सुरक्षित रख लिया है।
पीड़ित परिवार को मिल रही धमकियां
पीड़िता के परिवार के वकील ने अदालत को बताया कि परिवार को लगातार धमकियां मिल रही हैं। इस संबंध में संबंधित थाने में आवेदन भी दिया गया है और उसकी प्रति CBI को भी सौंपी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। परिवार का आरोप है कि जांच एजेंसियां मामले में गंभीरता नहीं दिखा रही हैं।
SIT जांच पर भी उठे सवाल
घटना के बाद पुलिस ने हॉस्टल मालिक को गिरफ्तार कर लिया और जांच SIT को सौंप दी। लेकिन परिवार ने SIT की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।
परिजनों का कहना है कि: घटना स्थल को समय पर सील नहीं किया गया, हॉस्टल में पुलिस तीन दिन बाद पहुंची, बेडशीट धो दी गई, CCTV DVR से छेड़छाड़ की गई, कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इतने समय में कई महत्वपूर्ण सबूत नष्ट हो सकते हैं।
CBI को सौंपी गई जांच
बढ़ते राजनीतिक दबाव और विवाद के बाद बिहार सरकार ने इस मामले की जांच CBI को सौंप दी। फिलहाल CBI इस केस से जुड़ी फाइलों का अध्ययन कर रही है और आगे की जांच प्रक्रिया तय कर रही है। हालांकि, पीड़िता के परिवार का कहना है कि उन्होंने CBI जांच की मांग नहीं की थी, बल्कि न्यायिक जांच की मांग की थी।
राजनीति भी हुई तेज
इस मामले ने बिहार की राजनीति में भी हलचल मचा दी है। विपक्षी दल राजद और कांग्रेस लगातार राज्य सरकार पर निशाना साध रहे हैं और इसे कानून-व्यवस्था की विफलता बता रहे हैं। वहीं, बिहार के डिप्टी सीएम विजय सिन्हा पीड़ित छात्रा के गांव जहानाबाद पहुंचे और परिवार से मुलाकात कर उन्हें न्याय का भरोसा दिलाया।
उन्होंने कहा: “सुशासन के राज में कोई भी दोषी बच नहीं सकता। चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो, दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई होगी।” उन्होंने यह भी बताया कि मामले को लेकर पुलिस महानिदेशक और गृह मंत्री से भी बातचीत की गई है और जांच की निगरानी लगातार की जा रही है।
क्या जुड़ेंगी POCSO की धाराएं?
पुलिस सूत्रों के अनुसार, परिवार द्वारा दिए गए दस्तावेजों से संकेत मिलता है कि मृतक छात्रा नाबालिग थी। यदि यह साबित होता है, तो इस मामले में POCSO एक्ट की धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं, जिससे आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और सख्त हो सकती है।
सोशल मीडिया पर उबाल
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं:
क्या गर्ल्स हॉस्टल सुरक्षित हैं?
क्या राजनीतिक संरक्षण के कारण सच्चाई दबाई जा रही है?
क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच संभव होगी?
सच कब आएगा सामने?
पटना का यह मामला अब केवल एक छात्रा की मौत का नहीं, बल्कि छात्राओं की सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक प्रभाव से जुड़े बड़े सवालों का प्रतीक बन गया है। अब पूरे राज्य की नजरें CBI जांच और अदालत के फैसले पर टिकी हुई हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस मामले का सच सामने आएगा या यह भी कई विवादित मामलों की तरह फाइलों में दब जाएगा?

