भोपाल में इफ्तार पार्टी पर विवाद: RD Memorial College में बजरंग दल और VHP का प्रदर्शन
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मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के नीलबड़ स्थित RD Memorial College में 11 मार्च को आयोजित इफ्तार पार्टी अब बड़े विवाद का कारण बन गई है। कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हिंदू संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। इफ्तार कार्यक्रम में मुस्लिम छात्र-छात्राओं के साथ कुछ हिंदू छात्राएं भी शामिल दिखीं, जिससे विवाद और बढ़ गया।
वायरल वीडियो ने बढ़ाई आग
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कॉलेज परिसर में इफ्तार करते छात्र-छात्राओं का दृश्य दिखाई दे रहा है। इस वीडियो के सामने आने के बाद बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कार्यकर्ता आक्रोशित हो गए और इसे “धार्मिक पक्षपात” करार दिया।
कॉलेज गेट पर विरोध प्रदर्शन
वीडियो के वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में कार्यकर्ता कॉलेज गेट पर पहुंचे और जमकर नारेबाजी की।
हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया गया,
कॉलेज प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन हुआ,
धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग उठी,
‘शुद्धिकरण’ का दावा
प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने कॉलेज परिसर में गंगाजल छिड़ककर ‘शुद्धिकरण’ करने का दावा भी किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि कॉलेज में “इस्लामीकरण” को बढ़ावा दिया जा रहा है और शिक्षा संस्थानों को धार्मिक गतिविधियों से दूर रखा जाना चाहिए।
हिंदू संगठनों का आरोप
विश्व हिंदू परिषद के स्थानीय संयोजक जितेंद्र चौहान ने कहा: “कॉलेज में धार्मिक एजेंडा चलाया जा रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
कॉलेज प्रशासन की सफाई
कॉलेज प्रशासन ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा:
संस्थान में सभी धर्मों के त्योहार मनाए जाते हैं,
हाल ही में कॉलेज में होली भी मनाई गई थी,
इफ्तार कार्यक्रम आपसी सौहार्द और सांस्कृतिक समरसता के तहत आयोजित किया गया था
छात्रों की क्या राय?
कुछ छात्रों का कहना है कि यह आयोजन एकता और भाईचारे का प्रतीक था, जबकि कुछ छात्राओं के इफ्तार में शामिल होने को लेकर ही विवाद ने ज्यादा तूल पकड़ा।
ग्राउंड जीरो पर ताजा स्थिति
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने कॉलेज परिसर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है। इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए निगरानी जारी है, फिलहाल हालात नियंत्रण में बताए जा रहे हैं,
बड़ा सवाल: धार्मिक पक्षपात या सौहार्द?
यह मामला अब एक बड़े बहस का रूप ले चुका है:
क्या शिक्षण संस्थानों में धार्मिक कार्यक्रम होने चाहिए?
क्या यह सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक है या पक्षपात?
क्या सोशल मीडिया विवादों को बढ़ाने का माध्यम बन रहा है?
भोपाल का यह मामला केवल एक कॉलेज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देशभर में शिक्षा, धर्म और सामाजिक संतुलन को लेकर चल रही बहस को भी उजागर करता है।



