भारत में LPG सप्लाई को लेकर बड़ी खबर: होर्मुज जलडमरूमध्य के तनाव पर सरकार की नजर
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देश में रसोई गैस (LPG) की आपूर्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुझाता शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए स्वीकार किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ता तनाव भारत के लिए गैस आयात के लिहाज से चिंता का विषय बन सकता है।
हालांकि उन्होंने साफ कहा है कि फिलहाल देश में LPG की कोई कमी नहीं है और लगभग 25 हजार एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। सरकार ने जनता से अपील की है कि किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और पैनिक बायिंग से बचें।
क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। भारत समेत कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति इसी मार्ग पर निर्भर करती है।
भारत अपनी करीब 65% LPG जरूरत आयात से पूरी करता है, 85% से अधिक आयात इसी समुद्री मार्ग से होता है, मध्य-पूर्व के तेल और गैस निर्यात का बड़ा हिस्सा यहीं से गुजरता है, यदि इस मार्ग में किसी तरह का व्यवधान आता है तो गैस सप्लाई और कीमतों दोनों पर असर पड़ सकता है।
खाड़ी देशों पर निर्भरता
भारत रसोई गैस के लिए मुख्य रूप से खाड़ी देशों पर निर्भर है, जिनमें प्रमुख हैं: सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), इन देशों से आने वाले ज्यादातर गैस टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर भारत पहुंचते हैं, इसलिए यहां तनाव बढ़ने से सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका रहती है।
भारत की ओर आ रहे दो बड़े LPG जहाज
मिडिल-ईस्ट में तनाव के बीच भारत ने गैस सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार:
‘शिवालिक’ और ‘नंदा’ नाम के दो जहाज भारत की ओर बढ़ रहे हैं,
दोनों जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं,
इन जहाजों में कुल लगभग 92,700 मीट्रिक टन LPG लोड है,
इससे निकट भविष्य में देश में गैस आपूर्ति स्थिर रहने की उम्मीद जताई जा रही है।
घरेलू उत्पादन बढ़ाने का आदेश
सरकार ने बढ़ती अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता को देखते हुए घरेलू LPG उत्पादन बढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं। इसका उद्देश्य यह है कि यदि आयात में किसी तरह की बाधा आए तो भी देश में गैस की उपलब्धता बनी रहे।
LPG सब्सिडी के लिए 30,000 करोड़ रुपये मंजूर
सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए तेल कंपनियों को ₹30,000 करोड़ की LPG सब्सिडी देने की मंजूरी दी है।
इस फैसले का उद्देश्य है: घरेलू गैस की कीमतों को नियंत्रित रखना, आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ कम करना, सप्लाई सिस्टम को स्थिर बनाए रखना,
सरकार की जनता से अपील
पेट्रोलियम मंत्रालय और सरकारी अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि: अफवाहों पर विश्वास न करें, जरूरत से ज्यादा सिलेंडर न खरीदें, गैस की सप्लाई पूरी तरह नियंत्रण में है, सरकार के अनुसार देश में LPG की उपलब्धता अभी सामान्य है और स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
क्या भविष्य में बढ़ सकती हैं गैस की कीमतें?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिडिल-ईस्ट में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो:
अंतरराष्ट्रीय बाजार में LPG की कीमतें बढ़ सकती हैं,
शिपिंग लागत में वृद्धि हो सकती है,
इसका असर भारत के घरेलू बाजार पर भी पड़ सकता है,
हालांकि फिलहाल सरकार का दावा है कि देश में गैस की सप्लाई सुरक्षित है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता जरूर बढ़ा दी है, लेकिन सरकार का कहना है कि फिलहाल देश में LPG की कोई कमी नहीं है। पर्याप्त स्टॉक, नए जहाजों की खेप और घरेलू उत्पादन बढ़ाने जैसे कदमों से सप्लाई चेन को मजबूत बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।




