Hantavirus Alert: क्रूज शिप पर फैला रहस्यमयी वायरस

Yash Kulkarni
0 सेकंड पहलेSach dikhane ka shukriya, aisi journalism chahiye.
दुनियाभर में एक बार फिर रहस्यमयी वायरस को लेकर डर का माहौल बनता नजर आ रहा है। इस बार चर्चा में है हंता वायरस (Hantavirus), जिसने डच झंडे वाले लग्जरी क्रूज शिप MV Hondius पर कई लोगों को संक्रमित कर दिया है। अब तक जहाज से जुड़े 8 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें 5 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है जबकि 3 मामले संदिग्ध बताए जा रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस संक्रमण से अब तक 3 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में एक डच दंपती और एक जर्मन यात्री शामिल हैं।
जहाज फिलहाल अफ्रीका के केप वर्डे के पास लंगर डाले खड़ा है और उसमें कुल 149 लोग मौजूद बताए जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक जहाज पर दो भारतीय क्रू मेंबर भी सवार हैं, जिसके बाद भारत में भी चिंता बढ़ गई है। हालांकि उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
क्या कोरोना की तरह फैल सकता है हंता वायरस?
हंता वायरस को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या यह भी कोरोना वायरस की तरह तेजी से इंसान से इंसान में फैल सकता है? क्या केवल छूने या साथ रहने से संक्रमण हो जाएगा?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने फिलहाल इस खतरे को सीमित बताया है। WHO की इंफेक्शन डिजीज एक्सपर्ट Dr Maria Van Kerkhove ने साफ कहा कि हंता वायरस की तुलना SARS-CoV-2 यानी कोरोना वायरस से नहीं की जानी चाहिए। उनके मुताबिक यह वायरस उसी तरीके से नहीं फैलता जैसा कोविड फैला था।
उन्होंने कहा कि अधिकतर हंता वायरस इंसान से इंसान में नहीं फैलते। हालांकि कुछ दुर्लभ स्ट्रेन जैसे एंडीज स्ट्रेन में सीमित स्तर पर व्यक्ति से व्यक्ति संक्रमण की संभावना देखी गई है। इसी वजह से WHO इस पूरे मामले पर बेहद करीबी नजर बनाए हुए है।
कैसे फैलता है हंता वायरस?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार हंता वायरस मुख्य रूप से संक्रमित चूहों, उनके मल-मूत्र या लार के संपर्क में आने से फैलता है। जब संक्रमित कण हवा में मिल जाते हैं और कोई व्यक्ति उन्हें सांस के जरिए अंदर ले लेता है, तब संक्रमण हो सकता है।
इस वायरस के लक्षण शुरुआत में सामान्य फ्लू या सांस संबंधी बीमारी जैसे लगते हैं। मरीज को बुखार, शरीर दर्द, थकान, खांसी और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। गंभीर मामलों में यह फेफड़ों और किडनी को भी नुकसान पहुंचा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बंद जगहों जैसे क्रूज शिप में लंबे समय तक साथ रहने से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है। यही कारण है कि जहाज पर मौजूद यात्रियों और क्रू को आइसोलेशन में रखा गया है।
WHO ने क्यों जारी किया अंतरराष्ट्रीय अलर्ट?
WHO के मुताबिक जहाज पर पहला संक्रमित व्यक्ति 6 अप्रैल को बीमार पड़ा था और 11 अप्रैल को उसकी मौत हो गई। शुरुआत में डॉक्टरों को हंता वायरस का शक नहीं हुआ क्योंकि लक्षण सामान्य सांस संबंधी संक्रमण जैसे थे।
लेकिन जब एक के बाद एक कई लोग बीमार पड़ने लगे तब स्वास्थ्य एजेंसियों ने जांच शुरू की। इसके बाद संक्रमण की पुष्टि हुई और WHO ने तुरंत 12 देशों को अलर्ट जारी कर दिया, क्योंकि जहाज से जुड़े कुछ यात्री सेंट हेलेना में उतर चुके थे।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए WHO, नीदरलैंड के डॉक्टर और यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल की टीम जहाज पर पहुंच चुकी है। विशेषज्ञ यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि संक्रमण जहाज के अंदर फैला या यात्री पहले से संक्रमित थे।
छह हफ्ते तक छिपा रह सकता है संक्रमण
WHO ने बताया है कि हंता वायरस की इन्क्यूबेशन अवधि छह हफ्ते तक हो सकती है। यानी संक्रमण होने के बाद कई हफ्तों तक लक्षण सामने नहीं आते। यही वजह है कि दुनिया भर की स्वास्थ्य एजेंसियां यात्रियों की ट्रैकिंग और निगरानी कर रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्कता बेहद जरूरी है। खासकर उन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए जो संक्रमित इलाकों या जहाज से जुड़े लोगों के संपर्क में आए हों।
भारतीय क्रू मेंबर्स को लेकर बढ़ी चिंता
MV Hondius से जारी राष्ट्रीयता सूची में कुल 23 देशों के लोग शामिल बताए गए हैं। इसी सूची में दो भारतीय क्रू मेंबर्स का नाम भी सामने आया है। हालांकि कंपनी ने उनकी पहचान और स्वास्थ्य स्थिति सार्वजनिक नहीं की है।
भारत में फिलहाल इस मामले को लेकर कोई आधिकारिक स्वास्थ्य अलर्ट जारी नहीं हुआ है, लेकिन विशेषज्ञ लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। भारतीय दूतावास की ओर से भी अभी तक कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है।
क्या दुनिया फिर नई महामारी की ओर बढ़ रही है?
फिलहाल WHO ने इस संक्रमण को वैश्विक महामारी का खतरा नहीं माना है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि हंता वायरस कोरोना जितना संक्रामक नहीं है और यह सामान्य परिस्थितियों में तेजी से नहीं फैलता।
फिर भी क्रूज शिप जैसी बंद जगहों में संक्रमण का फैलाव चिंता का विषय बना हुआ है। यही कारण है कि दुनिया भर की स्वास्थ्य एजेंसियां इस मामले को बेहद गंभीरता से देख रही हैं ताकि किसी बड़े खतरे को समय रहते रोका जा सके




