जयपुर में ‘पिंक एलिफेंट’ फोटोशूट पर बवाल: कला या पशु क्रूरता?

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राजस्थान की राजधानी जयपुर, जिसे ‘पिंक सिटी’ के नाम से जाना जाता है, इन दिनों एक विवादित फोटोशूट को लेकर सुर्खियों में है। रूसी ट्रैवल फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेवा द्वारा किए गए एक फोटोशूट में एक हाथी को चमकीले गुलाबी रंग से रंगा गया था। इस फोटोशूट में मॉडल यशस्वी भी शामिल थीं।
हालांकि यह फोटोशूट नवंबर-दिसंबर 2025 में किया गया था, लेकिन हाल ही में इसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगे, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया।
‘चंचल’ कौन थी?
रिपोर्ट्स के अनुसार, फोटोशूट में इस्तेमाल की गई मादा हाथी का नाम चंचल था, जो जयपुर के हाथी गांव क्षेत्र की निवासी थी।
उम्र: लगभग 65–70 वर्ष,
हाल ही में निधन: फरवरी 2026,
मौत का कारण: प्राकृतिक (कोई प्रत्यक्ष संबंध फोटोशूट से नहीं),
हाथी गांव समिति के अध्यक्ष बल्लू खान और मालिक सादिक खान ने स्पष्ट किया कि चंचल को केवल 10–30 मिनट के लिए ऑर्गेनिक गुलाल से रंगा गया था, जिसे तुरंत धो दिया गया।
फोटोग्राफर का पक्ष
जूलिया बुरुलेवा का कहना है कि: उन्होंने जयपुर में 6 सप्ताह बिताए, शहर के गुलाबी रंग और सांस्कृतिक प्रतीकों से प्रेरित होकर यह प्रोजेक्ट बनाया, इस्तेमाल किया गया रंग “ऑर्गेनिक” और “होली में उपयोग होने वाला गुलाल” था, उनका कहना है कि यह एक कलात्मक अभिव्यक्ति (Artistic Expression) थी, न कि किसी तरह की क्रूरता।
सोशल मीडिया पर बंटी राय
इस फोटोशूट पर इंटरनेट दो हिस्सों में बंट गया है:
समर्थन में: कुछ लोगों ने इसे क्रिएटिव और विजुअली आकर्षक बताया, राजस्थान की संस्कृति और “पिंक सिटी” की थीम को सराहा,
विरोध में: कई यूजर्स ने इसे पशु क्रूरता बताया
सवाल उठाए:
क्या हाथी की अनुमति/सुरक्षा का ध्यान रखा गया?
क्या जानवरों का इस तरह उपयोग नैतिक है?
एक यूजर ने लिखा: "AI के दौर में जानवरों को रंगना कला नहीं, शोषण है।"
विशेषज्ञों की राय
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार: हाथियों की त्वचा बेहद संवेदनशील होती है, रंग, भले ही ऑर्गेनिक हो, तनाव और एलर्जी पैदा कर सकता है, ऐसे फोटोशूट से मानसिक तनाव भी हो सकता है,
वन विभाग की एंट्री
विवाद बढ़ने के बाद राजस्थान वन विभाग ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
जांच के मुख्य बिंदु:
क्या वन्यजीव संरक्षण कानूनों का उल्लंघन हुआ?
क्या हाथी को किसी प्रकार का नुकसान पहुंचा?
क्या अनुमति ली गई थी?
यदि दोषी पाए गए, तो संबंधित लोगों पर कानूनी कार्रवाई और जुर्माना हो सकता है।
पशु अधिकार संगठनों की चेतावनी
पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि: यह घटना भारत में कैद हाथियों की स्थिति को उजागर करती है, व्यावसायिक और मनोरंजन उद्देश्यों के लिए जानवरों का उपयोग बंद होना चाहिए,
PETA इंडिया ने पहले भी सुझाव दिया है कि: हाथी सवारी और शो को बंद किया जाए, उनकी जगह इलेक्ट्रिक वाहन या रोबोटिक विकल्प अपनाए जाएं,
बड़ा सवाल: कला या क्रूरता?
यह विवाद एक बड़े नैतिक प्रश्न को सामने लाता है:
क्या कला और क्रिएटिविटी के नाम पर जानवरों का इस्तेमाल उचित है?
क्या ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए सख्त नियम बनने चाहिए?
हालांकि ‘चंचल’ की मौत का फोटोशूट से कोई सीधा संबंध नहीं मिला है, लेकिन इस घटना ने पशु अधिकार, नैतिकता और कानूनों पर एक नई बहस को जन्म दिया है। अब सभी की नजर वन विभाग की जांच रिपोर्ट पर टिकी है।


