सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: पब्लिक प्लेस से हटेंगे आवारा कुत्ते

Harsh Pandya
1 दिन पहलेYeh mudda rajneeti se upar hai, insaniyat ki baat hai.
Sonu rai
1 दिन पहलेYeh samajik mudda bahut gambhir hai, dhyan dena zaroori hai.
Sonu rai
1 दिन पहलेLogon ki madad karna hi asli dharam hai.
Simran Arora
1 दिन पहलेCommunity ko mil ke aage aana hoga is mudde par.
देशभर में बढ़ते डॉग बाइट मामलों पर गंभीर चिंता जताते हुए Supreme Court of India ने 19 मई 2026 को बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने संबंधी अपने पुराने आदेश को बरकरार रखा है और उसमें बदलाव की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया।
याचिकाएं खारिज, पुराने आदेश कायम
सुप्रीम कोर्ट ने पशु प्रेमियों और एनजीओ की ओर से दायर उन याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को हटाने के आदेश में राहत मांगी गई थी। अदालत ने साफ कहा कि इंसानों की सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार सर्वोपरि है।
“आंखें नहीं मूंद सकते” – सुप्रीम कोर्ट
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि बच्चों, बुजुर्गों और यात्रियों पर बढ़ते कुत्तों के हमलों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाएं शहरी प्रशासन और शासन व्यवस्था पर लोगों के भरोसे को प्रभावित कर रही हैं।
ABC प्रोग्राम के खराब क्रियान्वयन पर नाराजगी
अदालत ने कहा कि Animal Birth Control (ABC) Rules 2023 को राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने सही तरीके से लागू नहीं किया, जिसके कारण स्थिति और गंभीर होती गई। कोर्ट ने कहा कि यदि समय पर नसबंदी और टीकाकरण अभियान प्रभावी ढंग से चलाए जाते, तो हालात इतने खराब नहीं होते।
राजस्थान से दिल्ली तक बढ़े डॉग बाइट केस
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के गंगानगर, सीकर, उदयपुर और भीलवाड़ा से आए चौंकाने वाले आंकड़ों का जिक्र किया। अदालत ने बताया कि दिल्ली के IGI एयरपोर्ट में जनवरी 2026 से अब तक 31 डॉग बाइट केस सामने आ चुके हैं, जिनमें विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं।
खतरनाक और रेबीज संक्रमित कुत्तों पर सख्त आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पागल, खूंखार या लाइलाज बीमारी से पीड़ित कुत्तों को दयामृत्यु (Euthanasia) देने जैसे कानूनी उपायों पर विचार किया जा सकता है। अदालत ने निर्देश दिया कि ऐसे कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों पर नहीं छोड़ा जाए।
हर जिले में बनेगा ABC सेंटर
कोर्ट ने राज्यों और नगर निकायों को निर्देश दिया कि हर जिले में कम से कम एक ABC सेंटर बनाया जाए, जहां नसबंदी, टीकाकरण और इलाज की पूरी सुविधा उपलब्ध हो। भीड़भाड़ वाले इलाकों और सार्वजनिक संस्थानों के आसपास विशेष निगरानी रखने को भी कहा गया।
सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सड़क, गली और सार्वजनिक जगहों पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर नियंत्रण जरूरी है। इसके लिए नगर निगमों को अलग “फीडिंग जोन” बनाने और वहां उचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
आदेश नहीं मानने पर होगी अवमानना
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि राज्य सरकारें और संबंधित अधिकारी अदालत के आदेशों का पालन नहीं करते हैं, तो इसे कोर्ट की अवमानना माना जाएगा। साथ ही हाई कोर्ट्स को आदेश के पालन की निगरानी करने को कहा गया है।
रेबीज के मामलों पर भी चिंता
WHO और नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के आंकड़ों का जिक्र करते हुए अदालत ने कहा कि भारत में हर साल हजारों लोग रेबीज के कारण जान गंवाते हैं। अदालत ने अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन और इम्युनोग्लोबुलिन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की मुख्य बातें
स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश बरकरार,
नसबंदी और वैक्सीनेशन अभियान तेज करने के निर्देश,
खूंखार और रेबीज संक्रमित कुत्तों को सार्वजनिक जगहों पर नहीं छोड़ा जाएगा,
हर जिले में ABC सेंटर बनाने के आदेश,
सार्वजनिक जगहों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर नियंत्रण,
आदेशों का पालन न होने पर अवमानना कार्रवाई की चेतावनी,
क्या है Animal Birth Control (ABC) Rules?
Animal Birth Control Rules 2001 और बाद में 2023 के संशोधित नियमों के तहत आवारा कुत्तों को बिना कारण मारा नहीं जा सकता। कानून के अनुसार उनकी नसबंदी और टीकाकरण अनिवार्य है। इस योजना का उद्देश्य आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करना और रेबीज जैसी बीमारियों को रोकना है।





