परीक्षा नज़दीक, छात्रों में तनाव का स्तर बढ़ा: छात्रों में अनियंत्रित विचार प्रवाह से तनाव और चिंता में उछाल

नई दिल्ली: देशभर में परीक्षा सीजन शुरू होने के साथ ही छात्रों में तनाव, चिंता और दबाव का स्तर चिंताजनक रूप से बढ़ रहा है। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि इस वर्ष विशेष रूप से “अनियंत्रित विचार प्रवाह” (Uncontrolled Thought Flow) से जुड़े मामले तेजी से सामने आ रहे हैं, जो छात्रों की एकाग्रता, आत्मविश्वास और प्रदर्शन पर गंभीर असर डाल रहे हैं।
परीक्षा का भय और ओवरथिंकिंग—सबसे बड़ा कारण
विशेषज्ञ बताते हैं कि जब छात्र एक ही विषय या सवाल को बार-बार सोचने लगते हैं, तो उनका विचार प्रवाह तेज़, अव्यवस्थित और अनियंत्रित हो जाता है। इससे छात्र वास्तविक पढ़ाई से भटक जाते हैं और मानसिक थकान बढ़ने लगती है।
कई छात्रों ने बताया कि वे “अगर फेल हो गया तो?”, “पेरेंट्स क्या सोचेंगे?”, “मैं दूसरों से पीछे रह जाऊंगा?” जैसे विचारों से परेशान हैं।
डिजिटल डिस्टर्बेंस और सोशल मीडिया भी जिम्मेदार
कई अध्ययन बताते हैं कि लगातार सोशल मीडिया स्क्रॉलिंग और मोबाइल नोटिफिकेशंस से छात्रों की एकाग्रता टूटती है। पढ़ाई के बीच अचानक उभरने वाले विचारों से विचार प्रवाह अनियंत्रित हो जाता है और तनाव बढ़ता है।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय
मनोचिकित्सकों का कहना है कि छात्रों को पर्याप्त नींद, समय पर ब्रेक, सीमित स्क्रीन टाइम, और माइंडफुलनेस जैसी आदतें अपनानी चाहिए।
विशेषज्ञ बताते हैं कि ओवरथिंकिंग से पढ़ाई की क्षमता सीधे प्रभावित होती है।
छात्र बार-बार किताब खोलते हैं, लेकिन मन भटकता रहता है।
विचारों का यह तेज़ प्रवाह उन्हें मानसिक रूप से कमजोर बनाता है और याद रखने की क्षमता कम कर देता है।
कई शोधों में पाया गया है कि लगातार चिंता, भविष्य की कल्पना, स्वयं पर दबाव, दूसरों से तुलना, ये सभी अनियंत्रित विचार प्रवाह को और बढ़ाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ओवरथिंकिंग कम करने के लिए डीप ब्रीदिंग, टाइम-टेबल प्लानिंग और पॉजिटिव सेल्फ-टॉक काफी मददगार साबित हो सकते हैं।







