“पहचान बताओ, इनाम पाओ!”: भीड़ हिंसा में हिंदू युवक की हत्या, देशभर में आक्रोश

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बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर बढ़ते हमलों को लेकर अंतरिम सरकार और प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस चौतरफा दबाव में आ गई है। भारत सरकार की सख्त प्रतिक्रिया और देशभर में हिंदू संगठनों के विरोध-प्रदर्शनों के बाद अब यूनुस सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।
बांग्लादेश पुलिस ने हिंदुओं के घरों में आग लगाने और हिंसा फैलाने वाले आरोपियों की पहचान बताने पर इनाम देने की घोषणा की है। यह ऐलान दक्षिण-पूर्वी बंदरगाह शहर चटगांव के पास हिंदू स्वामित्व वाले घर में आगजनी की घटना के बाद किया गया।
हिंदू परिवारों के घर जलाए गए
इत्तेफाक अखबार की रिपोर्ट के अनुसार अज्ञात बदमाशों ने मंगलवार रात दो हिंदू परिवारों के घरों में आग लगा दी। घर के दरवाजे बाहर से बंद कर दिए गए थे, लेकिन किसी तरह परिवार के सदस्य जान बचाकर बाहर निकलने में सफल रहे। बीते पांच दिनों में रावजान इलाके में सात हिंदू परिवारों के घर जलाए जा चुके हैं।
पुलिस ने अब तक पांच संदिग्धों को गिरफ्तार किया है और इलाके में विशेष सुरक्षा टीम तैनात की गई है। चटगांव रेंज के पुलिस प्रमुख अहसान हबीब ने स्पष्ट कहा है कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
भीड़ हिंसा में हिंदू युवक की हत्या
बांग्लादेश में भीड़ हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। हाल ही में मध्य मयमनसिंह में 28 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई और शव को आग के हवाले कर दिया गया। इस घटना के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।
इसके अलावा राजबाड़ी जिले में एक और हिंदू युवक अमृत मंडल उर्फ सम्राट की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने एक आरोपी को हथियारों के साथ गिरफ्तार किया है और मामले की जांच जारी है।
अंतरराष्ट्रीय चिंता और मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया
मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने बांग्लादेश में हो रही भीड़ हिंसा की कड़ी निंदा की है। रिपोर्टों के मुताबिक 2025 में अब तक 184 लोगों की मौत भीड़ हिंसा में हो चुकी है।
न्यूयॉर्क टाइम्स और द गार्जियन जैसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने भी बांग्लादेश में बढ़ती अराजकता और कट्टरपंथ पर चिंता जताई है।
हसीना के हटते ही बढ़ी हिंसा
विश्लेषकों का मानना है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश में राजनीतिक शून्य पैदा हुआ, जिसका फायदा कट्टरपंथी ताकतों ने उठाया। ढाका से लेकर चटगांव तक हिंसा, आगजनी और लिंचिंग की घटनाएं आम होती जा रही हैं।
यूनुस सरकार ने बयान जारी कर कहा है कि “आरोप, अफवाहें या मतभेद किसी भी तरह की हिंसा को ठहरा नहीं सकते।”







