कानपुर में बड़ा पुलिस एक्शन: NBW वारंट वाले 68 आरोपी गिरफ्तार

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उत्तर प्रदेश के कानपुर में अदालत के आदेशों की अनदेखी करने वाले आरोपियों पर पुलिस ने बड़ा शिकंजा कसा है। कोर्ट द्वारा जारी नॉन-बेलेबल वारंट (NBW) के बावजूद पेश न होने वाले 68 आरोपियों को एक विशेष अभियान के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। इस कार्रवाई से पूरे शहर में हलचल मच गई है और लोग पुलिस की सख्ती को लेकर चर्चा कर रहे हैं।
संयुक्त छापेमारी में मिली बड़ी सफलता
शनिवार को चलाए गए इस अभियान में एक दर्जन से अधिक थानों की पुलिस टीमों ने एक साथ छापेमारी की। घाटमपुर, नौबस्ता, बाबूपुरवा, किदवई नगर और गोविंद नगर समेत कई इलाकों में दबिश देकर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने सघन चेकिंग और नेटवर्किंग के जरिए 18 जिलों तक अपनी पहुंच बनाकर इस ऑपरेशन को सफल बनाया।
12 महिलाएं भी शामिल, कई मामलों में थे वांछित
गिरफ्तार किए गए 68 आरोपियों में 12 महिलाएं भी शामिल हैं। ये सभी आरोपी मारपीट, दहेज उत्पीड़न, चोरी, एनआई एक्ट और गैर-इरादतन हत्या जैसे गंभीर मामलों में वांछित थे। कोर्ट के समन और वारंट के बावजूद ये लंबे समय से पेश नहीं हो रहे थे, जिससे मामलों की सुनवाई प्रभावित हो रही थी।
“NBW डायग्राम” बनाकर दिया सख्त संदेश
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने एक अनोखा कदम उठाते हुए सभी आरोपियों को एक साथ पुलिस ऑफिस में लाकर “NBW डायग्राम” तैयार किया। इसमें आरोपियों को चारों तरफ से पुलिस के घेरे में खड़ा किया गया। इसका मकसद यह दिखाना था कि कानून से बचना नामुमकिन है और अदालत के आदेशों का पालन करना अनिवार्य है।
DCP साउथ का बयान
पुलिस उपायुक्त (DCP) साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि ये सभी आरोपी लंबे समय से अदालत से बच रहे थे। पुलिस बार-बार समन भेज रही थी, लेकिन इसके बावजूद कोई पेश नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद यह अभियान चलाया गया और आगे भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।
आगे की कार्रवाई और पुलिस की योजना
गिरफ्तार आरोपियों का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है, जिसके बाद उन्हें न्यायालय में पेश किया जाएगा। पुलिस ने बताया कि अभी भी कई वारंटी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें अन्य जिलों में भेजी गई हैं। जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार किया जाएगा।
कानून व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम
कानपुर पुलिस की यह कार्रवाई कानून व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। इससे साफ संदेश गया है कि कोर्ट के आदेशों की अनदेखी अब किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।








