ट्रंप ने ईरान पर लगाया सीजफायर उल्लंघन का आरोप: होर्मुज में जहाज पर हमले के बाद बढ़ा अमेरिका-ईरान तनाव

Yash Kulkarni
0 सेकंड पहलेHum sabko milke is global challenge ka samna karna hoga.
Nidhi kumari
0 सेकंड पहलेIndia ka is maamle mein kya role hoga?
Vihaan Patel
0 सेकंड पहलेVishwa shanti ke liye yeh situation concerning hai.
मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर सीजफायर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। यह बयान 25 जून को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे एक कमर्शियल कार्गो जहाज पर हुए कथित ड्रोन हमले के बाद सामने आया। अमेरिका का दावा है कि हमले के पीछे ईरान समर्थित बलों का हाथ था, जबकि ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को ही युद्धविराम का उल्लंघन बताया है।
ट्रंप बोले- ईरान ने दागे वन-वे अटैक ड्रोन
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे एक कमर्शियल जहाज पर कम से कम चार वन-वे अटैक ड्रोन दागे। उनके अनुसार एक ड्रोन जहाज के ऊपरी हिस्से से टकराया, जिससे जहाज को नुकसान पहुंचा, जबकि बाकी तीन ड्रोन अमेरिकी सेना ने हवा में ही मार गिराए। ट्रंप ने इस घटना को सीजफायर समझौते का "मूर्खतापूर्ण उल्लंघन" बताया।
CENTCOM का दावा- 'एमवी एवर लवली' पर हुआ हमला
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, 25 जून को होर्मुज स्ट्रेट में सिंगापुर के झंडे वाले कार्गो शिप एमवी एवर लवली (MV Ever Lovely) पर ड्रोन हमला किया गया। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि जहाज के कंट्रोल सेक्शन को नुकसान पहुंचा, लेकिन चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित रहे और जहाज अपनी यात्रा जारी रखने में सफल रहा।
UKMTO ने भी हमले की पुष्टि की
ब्रिटिश नौसेना की समुद्री सुरक्षा एजेंसी UKMTO के मुताबिक, ओमान के तट के पास एक मालवाहक जहाज पर मिसाइल या ड्रोन से हमला हुआ, जिससे जहाज के ब्रिज और कंट्रोल रूम को नुकसान पहुंचा। हालांकि इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं मिली।
ईरान का पलटवार- अमेरिका ने पहले तोड़ा युद्धविराम
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने जवाबी कार्रवाई में क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। वहीं ईरानी सांसद इब्राहिम अजीजी ने कहा कि अमेरिका ने बातचीत के दौरान हमला कर युद्धविराम का उल्लंघन किया है और इसका परिणाम उसे भुगतना पड़ेगा।
NATO देशों पर भी साधा निशाना
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका और इजराइल का समर्थन करने वाले NATO सदस्य देशों की भी आलोचना की है। मंत्रालय का कहना है कि इन देशों को स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का समर्थन क्यों किया।
समुद्री सुरक्षा और तेल बाजार पर असर
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। यहां बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। संयुक्त राष्ट्र से जुड़े समुद्री अभियानों पर भी असर पड़ा है और तेल बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। वहीं भारत ने कमर्शियल LPG की आपूर्ति सामान्य बनाए रखने के लिए प्रतिबंधों में राहत देने का फैसला किया है।
बातचीत भी जारी, लेकिन तनाव बरकरार
तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी स्तर की वार्ता भी जारी है। दोनों देशों ने चार संयुक्त समितियां गठित करने और अगले 60 दिनों में संभावित समझौते का रोडमैप तैयार करने पर सहमति जताई है। रूस ने भी संकेत दिया है कि अंतिम समझौते की स्थिति में वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उसका समर्थन करेगा। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने जल्द ही ईरान के परमाणु ठिकानों का निरीक्षण करने की बात कही है।
स्थिति पर बनी हुई है नजर
फिलहाल अमेरिका और ईरान दोनों एक-दूसरे पर युद्धविराम तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं। घटनाक्रम ने मध्य पूर्व में सुरक्षा, वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि जारी कूटनीतिक वार्ता तनाव को कम करने में कितनी सफल होती है।





